सनातन धर्म में विवाह को केवल दो लोगों के सामाजिक बंधन के रूप में नहीं देखा जाता। इसके साथ जुड़ी धार्मिक परंपराएँ भी उसी तरह महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विवाह के लिए शुभ समय, तिथि और ज्योतिष संबंधी विभिन्न नियमों का पालन किया जाता है। वर्तमान में पुरुषोत्तम मास या अधिमास चल रहा है, जिसे कई लोग मलमास के नाम से भी जानते हैं। इस समय आमतौर पर कोई शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता। हालांकि 2026 के 15 जून को अधिमास खत्म होने के बाद तुरंत ही विवाह की तिथि तय नहीं की जाती। विशेष रूप से यदि परिवार का बड़ा लड़का या बड़ी लड़की विवाह कर रही हो, तो उस मामले में कुछ और दिनों तक प्रतीक्षा करनी होती है। क्यों ?
त्रिज्येष्ठ दोष
परदे में 'त्रिज्येष्ठ दोष' छिपा हुआ है। हिंदू धर्मशास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, ज्यैष्ट मास में घर के ज्येष्ठ संतान अर्थात बड़े बेटे या बड़े बेटी की शादी करना शुभ नहीं माना जाता। यदि ज्यैष्ट मास में, ज्येष्ठ संतान की शादी होती है, तो त्रिज्येष्ठ दोष उत्पन्न होता है। यह दोष वैवाहिक जीवन में अशांति, मतभेद या विभिन्न समस्याओं का कारण बन सकता है ऐसा विश्वास है। इसलिए इस समय में बड़े बेटे या बेटी की शादी न करने की सलाह दी जाती है।
केवल बड़ा बच्चा ही नहीं, अगर कोई व्यक्ति घर का सबसे छोटा बच्चा भी हो, लेकिन उसका जन्म बड़े नक्षत्र में हुआ हो, तब भी ऐसा माना जाता है कि जैष्ठ महीने में विवाह न करना ही अच्छा है।
शादी कब होगी ?
साल 2026 में जैष्ठ महीना लंबा है। कारण, इस साल अधिमास जैष्ठ माह में ही पड़ा है। इसलिए जैष्ठ महीना 2 मई 2026 से शुरू होकर 29 जून 2026 तक चलेगा। अतः 15 जून अधिमास समाप्त होने के बाद अन्य शुभ कार्य और विवाह शुरू हो सकते हैं, फिर भी घर के बड़े बेटे या बड़ी बेटी का विवाह 29 जून के बाद करना ही अधिक शुभ माना जा रहा है।