इंदौरः मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर में शुक्रवार को अलग ही माहौल देखने को मिला। इंदौर खंडपीठ के ऐतिहासिक फैसले के बाद पहली बार शुक्रवार को यहां मुस्लिम समुदाय की नमाज नहीं हुई, बल्कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने हाल ही में अपने फैसले में विवादित परिसर की धार्मिक प्रकृति को भोजशाला और मां सरस्वती के मंदिर के रूप में माना था। इसके बाद शुक्रवार को यहां पूजा का विशेष आयोजन हुआ।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
भोज उत्सव समिति के महासचिव सुमित चौधरी ने बताया कि पहले हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मुस्लिम समुदाय यहां नमाज अदा करता था। लेकिन अदालत के आदेश के बाद इस बार पहली बार हिंदू श्रद्धालुओं ने शुक्रवार को पूजा की। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले के बाद श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिला और लोग बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचे।
श्रद्धालु अंकित जोशी ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद यह अवसर मिला है। उनके अनुसार, लोगों में मां सरस्वती की पूजा को लेकर खास उत्साह है और इस फैसले को श्रद्धालु बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं।
वहीं श्रद्धालु ज्योति सोनी ने कहा कि लंबे समय बाद शुक्रवार को बिना किसी बाधा के दर्शन और पूजा का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता।”
हाईकोर्ट ने क्या कहा
इंदौर खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि विवादित स्थल का धार्मिक स्वरूप भोजशाला और मां सरस्वती मंदिर का है। अदालत ने 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा बनाई गई उस व्यवस्था को भी आंशिक रूप से निरस्त कर दिया, जिसमें हिंदुओं की पूजा और मुस्लिम समुदाय की नमाज को लेकर समय तय किया गया था।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब परिसर के प्रशासन और प्रबंधन से जुड़े फैसले केंद्र सरकार और ASI करेंगे। हालांकि, संरक्षित स्मारक होने के कारण परिसर की देखरेख, संरक्षण और धार्मिक गतिविधियों के नियमन की जिम्मेदारी ASI के पास ही रहेगी।
मुस्लिम पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्होंने फैसले को चुनौती दी है और उन्हें जल्द स्थगन आदेश मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने के कारण शुक्रवार को भोजशाला में नमाज अदा नहीं की गई।
लंबे समय से जारी है विवाद
धार स्थित यह विवादित परिसर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच विवाद का विषय रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बताता है।
मामला अदालत में लंबित रहने के दौरान राज्य प्रशासन ने साझा व्यवस्था लागू की थी और परिसर ASI की निगरानी में था। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।