नई दिल्ली : कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के कारण नौकरियों पर बढ़ते खतरे के बीच सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च एंड गवर्नेंस (सीपीआरजी) के संस्थापक-निदेशक रामानंद ने कहा है कि एआई कुछ पारंपरिक नौकरियों को जरूर खत्म कर रहा है लेकिन इसके साथ ही यह नए रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है।
उन्होंने सीपीआरजी और एआई 4 इंडिया की संयुक्त रिपोर्ट “फ्यूचर ऑफ जॉब्स इन द एज ऑफ एआई: इमर्जिंग रोल्स, न्यू ऑपर्च्युनिटीज” के प्रकाशन के दौरान कहा कि दुनिया भर में एआई आधारित स्वचालन को लेकर चिंता बढ़ रही है। विशेष रूप से मेटा जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों में हाल में हुई छंटनी के बाद यह बहस तेज हुई है कि एआई इंसानों की जगह ले रहा है।
रामानंद ने कहा कि यह बात आंशिक रूप से सही है क्योंकि एआई कुछ कार्यों को मशीनों के जरिए पूरा कर रहा है। हालांकि इसके साथ ही कई नए क्षेत्रों में रोजगार भी तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि डाटा सेंटर, एआई प्रणाली संचालन, एआई प्रशासनिक ढांचा, प्रशिक्षण और कौशल विकास जैसे क्षेत्र भविष्य में बड़े रोजगार केंद्र बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के दौरान पहले भी कई पारंपरिक नौकरियां समाप्त हुई हैं लेकिन हर बार नई आर्थिक संभावनाएं भी सामने आई हैं। उनके अनुसार वर्तमान बदलाव भी तकनीक के स्वाभाविक विकास का हिस्सा है।
रामानंद ने सरकार, उद्योग जगत और प्रशासन से मिलकर तेजी से तैयारी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत को नीतिगत तैयारी में देरी नहीं करनी चाहिए। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो दूसरे देश एआई आधारित रोजगार के अवसरों में आगे निकल सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई से जुड़ी आधारभूत संरचना, प्रशासनिक व्यवस्था और कौशल विकास क्षेत्रों में आने वाले समय में तेजी से रोजगार बढ़ने की संभावना है। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया है कि बदलती तकनीकी दुनिया में समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए कार्यबल को नए कौशलों के अनुसार तैयार करना बेहद जरूरी होगा।