सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 27 किलोमीटर की जमीन सौंपे जाने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर कांटेदार तार की बाड़ लगाने का काम शुरू हो चुका है। इस कदम को भारतीय सीमा को मजबूती देने के उद्देश्य से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बाड़ लगाने का काम सिलीगुड़ी सब डिविजन के फांसीदेवा में शुरू किया गया है। इस पहल से सीमा पर निगरानी व्यवस्था के और भी मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही इस पहल के शुरू होने से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। स्थानीय निवासियों ने इसे सुरक्षा की दिशा में उठाया जा रहा महत्वपूर्ण कदम करार दिया।
इस बारे में स्थानीय एक निवासी अनिल घोष ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र की पहले कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। यहां का माहौल इतना ज्यादा भयावह था जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल होता था। हम यहां गो पालन तक नहीं कर पाते थे। गाय पालने का मतलब खुद को बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को सौंप देना होता था। उक्त व्यक्ति ने इसे सिर्फ पश्चिम बंगाल नहीं बल्कि पूरी देश की सुरक्षा का मुद्दा बताया।
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उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि नई सरकार और नए मुख्यमंत्री के प्रयासों के बाद अब हम सुरक्षित हैं। एक अन्य स्थानीय ने कहा कि अब हम राहत महसूस कर रहे हैं। उक्त स्थानीय निवासी का कहना है कि शुभेंदु अधिकारी के आने के बाद BSF को 10 दिनों के भीरत पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति दे दी गयी। इससे ग्रामीण बेहद खुश हैं। अब हम खुलकर सांस ले सकते हैं। शांति से सो सकेंगे।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हावड़ा में बैठक के बाद कहा था कि राज्य सरकार भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 27 किलोमीटर जमीन सौंपने के लिए तैयार है। इसके साथ ही सीमा चौकियों और BSF के बुनियादी ढांचे के लिए अतिरिक्त जमीन भी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा था कि यह फैसला केंद्रीय एजेंसियों के साथ फिर से बेहतर समन्वय के बाद लिया गया है क्योंकि पहले भूमि आवंटन में देरी हो रही थी।