कोलकाता : आईएसएल ट्रॉफी जीतने की उम्मीद कुछ सप्ताह पहले तक शायद ही किसी ने की थी। क्लब के सदस्य, समर्थक और फुटबॉल विशेषज्ञ-किसी को भी नहीं लग रहा था कि इस बार ईस्टबेंगाल चैंपियन बन पाएगा। लेकिन शुक्रवार की शाम जब ईस्टबेंगाल मैदान में खिताबी जीत का जश्न मनाया जा रहा था और मैं, रशिद तथा क्रेस्पो समर्थकों के सामने ट्रॉफी लहराकर उत्सव मना रहे थे, तब ऐसा महसूस हो रहा था मानो कोई सपना सच हो गया हो।
सच कहूं तो उस समय तक भी यकीन करना मुश्किल था कि जिस टीम के लिए कुछ हफ्ते पहले तक कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी, वही अब देश की सबसे बड़ी लीग की विजेता बन चुकी है। हालांकि एक व्यक्ति ऐसे थे जिन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। उनका नाम है ऑस्कर ब्रूजो। हमारे मुख्य कोच।
अपने 17 साल लंबे करियर में मैंने देश और विदेश के कई प्रशिक्षकों के साथ काम किया है। हर कोच अपनी अलग सोच और रणनीति के साथ टीम को आगे बढ़ाने की कोशिश करता है। किसी को सफलता मिली, किसी को नहीं। लेकिन ऑस्कर सर की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत मानसिकता है। जब स्टेडियम में ‘गो बैक’ के नारे लग रहे थे, तब भी वह ड्रेसिंग रूम में लौटकर टीम से कहते थे-“हम चैंपियन बनेंगे। इस मैच को भूल जाओ और अगले मुकाबलों पर ध्यान दो।”
उनकी यही बात धीरे-धीरे पूरी टीम के भीतर जिद और आत्मविश्वास में बदल गई। हम सभी को लगने लगा कि इस बार ट्रॉफी हमारी ही होगी। मोहनबागान के खिलाफ मुकाबले में भी हम इसी सोच के साथ उतरे थे कि जीत हासिल कर सीधे चैंपियन बन जाएंगे। हालांकि वह संभव नहीं हो पाया, लेकिन अंतिम मैच जीतने को लेकर टीम के हर खिलाड़ी के मन में पूरा भरोसा था।
इस सीजन में कोच ने टीम के चार खिलाड़ियों को कप्तानी की जिम्मेदारी दी थी-मैं, महेश, रशिद और क्रेस्पो। महेश के लिए अफसोस होता है, क्योंकि चोट की वजह से वह इस ऐतिहासिक ट्रॉफी जीत के पल का हिस्सा नहीं बन सका।
मैं पहले मोहनबागान के साथ आई-लीग और फेडरेशन कप जीत चुका हूं। हैदराबाद एफसी के साथ आईएसएल खिताब भी अपने नाम किया है। लेकिन ईस्टबेंगाल की जर्सी पहनकर मिली यह सफलता मेरे लिए सबसे खास है। इसकी वजह यह है कि 22 साल बाद क्लब ने देश की शीर्ष लीग अपने नाम की है।
नई पीढ़ी के लिए यह जीत प्रेरणा का काम करेगी। यह सिर्फ ईस्टबेंगाल की उपलब्धि नहीं, बल्कि बंगाल फुटबॉल के लिए भी बेहद सकारात्मक संकेत है। लंबे समय से मोहनबागान और ईस्टबेंगाल के बीच प्रतिस्पर्धा एकतरफा होती जा रही थी। और जब मुकाबला एकतरफा हो जाए, तब खेल में प्रगति की चमक भी कम हो जाती है।