नई दिल्लीः देश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अगले चार महीनों में देशभर में 50 नए इंडस्ट्रियल पार्कों के लिए राज्यों से आवेदन मांगे जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इनमें से पहले 50 पार्क अगले तीन वर्षों के भीतर पूरी तरह चालू हो जाएं।
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार उद्योगों को बेहतर माहौल देने और कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए तेजी से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘भारत औद्योगिक विकास योजना’ यानी ‘भव्य’ स्कीम के तहत देशभर में 100 आधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इस योजना को 18 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है और इसके लिए 33,660 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
दो चरणों में शुरू होगी प्रक्रिया
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहले चरण में 25 इंडस्ट्रियल पार्कों के लिए राज्यों से अगले दो महीनों में आवेदन मांगे जाएंगे। इसके बाद अगले दो महीनों में 30 और पार्कों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। यानी अगले चार महीनों में कुल 50 पार्कों की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में अधिकारियों ने पहले 50 पार्कों के लिए लंबा समय मांगा था, लेकिन उन्होंने खुद फाइल वापस भेजकर समयसीमा कम करने को कहा। उनका लक्ष्य है कि तीन साल के भीतर पहले 50 पार्क काम करना शुरू कर दें।
उद्योगों को मिलेगा ‘रेडी टू मूव’ इंफ्रास्ट्रक्चर
सरकार इन पार्कों को प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर विकसित करेगी। यानी कंपनियों को उद्योग लगाने के लिए पहले से तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा। यहां सड़क, बिजली, पानी, डिजिटल कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउस जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
इसके साथ ही स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और आवास जैसी सामाजिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी ताकि औद्योगिक क्षेत्रों में कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर जीवन सुविधाएं मिल सकें।
लाइसेंस और मंजूरी की प्रक्रिया होगी आसान
पीयूष गोयल ने कहा कि उद्योग शुरू करने में सबसे बड़ी परेशानी मंजूरियों और लाइसेंस की होती है। इसे आसान बनाने के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल यानी एसपीवी को विशेष अधिकार दिए जाएंगे। इसके जरिए फैक्टरी लाइसेंस, प्रदूषण नियंत्रण मंजूरी, बॉयलर और विस्फोटक लाइसेंस जैसी प्रक्रियाएं तेज होंगी।
उन्होंने बताया कि इन पार्कों में कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट, टेस्टिंग सेंटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी साझा सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
जमीन राज्य देंगे, केंद्र करेगा मदद
इस योजना के तहत जमीन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी। केंद्र सरकार साझा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रति एकड़ करीब एक करोड़ रुपये तक की सहायता देगी। अगर निजी जमीन पर पार्क विकसित किए जाते हैं और राज्य सरकार उसका समर्थन करती है, तो निजी भू-स्वामियों को भी प्रति एकड़ 50 हजार रुपये तक की मदद दी जाएगी।
केवल निर्यात नहीं, घरेलू उद्योगों पर भी जोर
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि यह योजना सिर्फ विशेष आर्थिक क्षेत्रों की तरह निर्यात तक सीमित नहीं होगी। इसका मकसद देश में बड़े स्तर पर औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देना है। इससे घरेलू बाजार और निर्यात दोनों को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि राज्यों के चयन में पारदर्शिता रखी जाएगी और जिन राज्यों ने पहले से जमीन चिन्हित कर ली है, उन्हें प्राथमिकता मिल सकती है। सरकार छोटे और पिछड़े इलाकों में भी छोटे इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने पर विचार कर रही है ताकि वहां रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा हों।
भारत की अर्थव्यवस्था को बताया मजबूत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि देश का निर्यात प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है और मई के आखिरी हफ्तों तक भी निर्यात वृद्धि जारी रही।
उन्होंने बताया कि मार्च 2026 तक समाप्त वित्त वर्ष में भारत में 95 अरब डॉलर का सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 17 प्रतिशत अधिक है। उनके मुताबिक, इससे साफ है कि वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की छवि एक भरोसेमंद निवेश गंतव्य के रूप में मजबूत हुई है।
स्टार्टअप और डीप टेक्नोलॉजी पर सरकार का फोकस
पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घरेलू विनिर्माण, डीप टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर लगातार काम कर रही है। इसके लिए एक लाख करोड़ रुपये के रिसर्च फाउंडेशन और 10 हजार करोड़ रुपये के स्टार्टअप फंड ऑफ फंड्स 2.0 जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं।
कनाडा और ब्रिटेन से व्यापारिक बातचीत तेज
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वह सोमवार से कनाडा दौरे पर जा रहे हैं, जहां वह अपने कनाडाई समकक्ष मनींदर सिद्धू से मुलाकात करेंगे। इस दौरान निवेश और मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत और कनाडा के बीच 50 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य रखा जा सकता है।
इसके अलावा ब्रिटेन के व्यापार मंत्री क्रिस ब्रायंट 2 जून को भारत आएंगे। इस दौरान भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते और स्टील आयात से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होगी।