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महंगे गहनों से दूरी, गोल्ड ईटीएफ में निवेश ने बनाया रिकॉर्ड

शेयर बाजार से पैसा निकाल निवेशक पहुंचे गोल्ड ईटीएफ में, रिकॉर्ड निवेश दर्ज

कोलकाता : विवाह सीजन से पहले सोने की ऊंची कीमतों ने आम खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है। परंपरा निभाने के लिए लोग गहने तो खरीद रहे है लेकिन भारी मेकिंग चार्ज कर और बाद में बिक्री के समय कटौती की वजह से यह सौदा अब पहले जितना लाभकारी नहीं माना जा रहा। दस ग्राम सोने की कीमत अगर डेढ़ लाख रुपये के आसपास मानी जाए तो खरीद और बिक्री के बीच विभिन्न शुल्कों के कारण कुल खर्च काफी बढ़ जाता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में निवेशक अब पारंपरिक आभूषणों से हटकर गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड और सोने के सिक्कों या बार जैसे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में पहली बार देश में सोने के गहनों की खरीद से अधिक निवेश फिजिकल और डिजिटल गोल्ड में दर्ज किया गया। निवेशकों ने गहनों पर अतिरिक्त खर्च करने के बजाय सीधे निवेश वाले विकल्पों को प्राथमिकता दी।

यह बदलाव केवल अनुमान नहीं, बल्कि आंकड़ों से भी स्पष्ट हुआ है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी-मार्च तिमाही में भारत में सोने में कुल निवेश 82 मीट्रिक टन रहा जबकि इसी अवधि में सोने के गहनों की खरीद 66 मीट्रिक टन रही। यानी पहली बार निवेश का आंकड़ा गहनों की मांग से आगे निकल गया।

इस प्रवृत्ति की पुष्टि हाल में जारी जेरोधा फंड हाउस की रिपोर्ट से भी हुई। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश में कुल ईटीएफ निवेश 1.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इनमें से 68,868 करोड़ रुपये केवल गोल्ड ईटीएफ में लगाए गए। इससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा तेजी से पेपर गोल्ड की ओर बढ़ रहा है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण पिछले वित्त वर्ष में सोने ने करीब 69 प्रतिशत का रिटर्न दिया। इसी वजह से कई निवेशकों ने शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में निवेश बढ़ाया। हालांकि इस बार निवेश का बड़ा हिस्सा गहनों के बजाय ईटीएफ के माध्यम से किया गया।

केवल सोना ही नहीं, चांदी आधारित ईटीएफ में भी निवेश बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में सिल्वर ईटीएफ में 30,412 करोड़ रुपये का निवेश हुआ जो देश में कुल ईटीएफ निवेश का लगभग 16.8 प्रतिशत रहा।

विशेषज्ञों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में शेयर बाज़ार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी में 3.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत इसी अवधि में चांदी में निवेश करने वालों को करीब 120 प्रतिशत का रिटर्न मिला। इसी कारण सिल्वर ईटीएफ में निवेश का आकर्षण बढ़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी के गहनों में निवेश के साथ कई अतिरिक्त खर्च जुड़े होते हैं। मेकिंग चार्ज, कर, गलन कटौती और खरीद-बिक्री मूल्य के अंतर के अलावा तरलता की समस्या भी रहती है। अधिकांश मामलों में फिजिकल गोल्ड या सिल्वर को उचित कीमत पर बेचने के लिए सही खरीदार ढूंढना आसान नहीं होता।

इसके विपरीत, ईटीएफ में निवेश अपेक्षाकृत अधिक तरल माना जाता है। निवेशक इन्हें शेयर बाज़ार के माध्यम से आसानी से खरीद और बेच सकते हैं। यहां लेनदेन पर कर तो देना पड़ता है लेकिन मेकिंग चार्ज या गलन जैसी अतिरिक्त लागत नहीं होती। यही कारण है कि धीरे-धीरे बड़ी संख्या में निवेशक गहनों के बाज़ार से निकलकर डिजिटल और पेपर गोल्ड की ओर बढ़ रहे हैं।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम दिखाई देती है। ऐसे में निवेश मूल्य को बेहतर बनाने के लिए लोगों का रुझान आगे भी पेपर गोल्ड और ईटीएफ की ओर बढ़ सकता है। हालांकि इस बदलती प्रवृत्ति से पारंपरिक आभूषण उद्योग और गहना निर्माताओं के सामने नई चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है।

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