बेंगलुरु: जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी बढ़ रही है, वैसे-वैसे साइबर क्राइम भी बढ़ते जा रहे हैं। देशभर से लगातार 'डिजिटल अरेस्ट' के मामले सामने आते रहे हैं। अब ऐसा ही एक मामला कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से आया है, जहां कथित तौर पर 74 साल की एक बुजुर्ग महिला से 24 करोड़ रुपये की ठगी की गई। आरोपियों ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर महिला से ठगी की। महिला को 73 दिन तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया था।
साइबर अपराधियों ने खुद को CBI और ED के अधिकारी के रूप में पेश किया और लक्ष्मी राममूर्ति को 'डिजिटल अरेस्ट' कर अपने जाल में फंसा लिया।
बुजुर्ग महिला को कैसे फंसाया ?
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बुजुर्ग महिला को यकीन दिलाया कि वह जांच के दायरे में है और उसे अपने ICICI बैंक खाते से बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। 10 फरवरी से 24 अप्रैल के बीच, महिला ने कथित तौर पर 26 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए लगभग 24 करोड़ रुपये देश भर के 10 अलग-अलग बैंकों में फैले 23 बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
जांच में खुलासा हुआ कि जालसाज पीड़ित महिला से और भी ज्यादा पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे थे। 24 अप्रैल को, महिला कथित तौर पर आरोपियों को और पैसे ट्रांसफर करने के लिए 3 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन लेने वाली थी।
हालांकि, ICICI बैंक के अधिकारियों ने संदिग्ध गतिविधि को भांप लिया और कर्नाटक साइबर कमांड यूनिट को सूचित किया। साइबर टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पीड़ित को समझाया, जिससे जालसाजों को 3 करोड़ और ट्रांसफर होने से रोक लिया गया।
फिर पुलिस ने शुरू की जांच
पुलिस ने एक मामला दर्ज किया और इंटर स्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क की बड़े पैमाने पर जांच शुरू की।
जांच के दौरान, साइबर कमांड यूनिट ने 'म्यूल' यानी बिचौलियों के खातों को ट्रैक किया, जहां रकम को भेजा और खपाया गया था। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की मदद से पुलिस ने इन खातों को भी फ्रीज कर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान 4 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम फ्रीज कर दी गई, जबकि 1.46 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम अदालत के आदेशों के जरिए बरामद की गई।
6 आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास 6 मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें- एन. शिवज्ञानम (इरोड, तमिलनाडु), अक्काच मलिक (मुंबई, महाराष्ट्र), पलक भाई पटेल (अहमदाबाद, गुजरात), अमित नरेंद्र पटेल (अहमदाबाद, गुजरात), ओम प्रकाश राजपूत (नई दिल्ली) और गौरव कुमार (बिहार) हैं।
कर्नाटक की साइबर कमांड यूनिट ने बताया कि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों का पता लगाने और देशव्यापी साइबर धोखाधड़ी के इस ऑपरेशन के पीछे के मुख्य साजिशकर्ताओं की पहचान करने के लिए जांच जारी है।