कोलकाताः नगर पालिका भर्ती घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक अनौपचारिक सिफारिश आधारित व्यवस्था का जिक्र किया है, जिसे ‘काउंसलर कोटा’ कहा जा रहा है। आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की जगह सिफारिश और प्रभाव का इस्तेमाल हुआ और चयन से पहले ही उम्मीदवारों के नाम आगे बढ़ा दिए जाते थे।
‘काउंसलर कोटा’ कैसे बना समानांतर भर्ती सिस्टम
जांच के अनुसार नगर पालिकाओं की भर्ती प्रक्रिया के समानांतर एक अलग ढांचा काम कर रहा था, जिसे आधिकारिक नियमों का हिस्सा नहीं बताया गया है। इस कथित व्यवस्था में पार्षद अपने-अपने क्षेत्र से उम्मीदवारों के नाम आगे बढ़ाते थे और परिषद स्तर पर भी अलग-अलग सूची तैयार की जाती थी।
इन सिफारिशों का असर सीधे भर्ती प्रक्रिया पर पड़ता था। ईडी (ED) का कहना है कि यह एक अनौपचारिक लेकिन प्रभावशाली नेटवर्क था, जिसमें नियुक्तियों को प्रभावित करने की भूमिका सामने आई है।
सुजीत बसु पर ‘मास्टरमाइंड’ होने का गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ नेता सुजीत बसु का नाम प्रमुखता से सामने आया है। ईडी (ED) का दावा है कि वे दक्षिण दमदम नगर पालिका में उपाध्यक्ष रहते हुए भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सिफारिश तंत्र पर प्रभाव रखते थे।
जांच एजेंसी के अनुसार कई भर्ती मामलों में उनके नाम का उल्लेख मिलता है और उनके कार्यकाल के दौरान यह कथित ‘काउंसलर कोटा’ प्रणाली सक्रिय रही। ईडी उन्हें इस पूरे भर्ती घोटाले का मास्टरमाइंड बता रही है, हालांकि यह आरोप जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं।
डिजिटल रिकॉर्ड से सिफारिशों के बड़े नेटवर्क का संकेत
आरोपी अधिकारी अयान शील के ठिकानों से मिले डिजिटल दस्तावेजों ने जांच को और अहम दिशा दी है। ईडी के अनुसार इन रिकॉर्ड्स में भर्ती से जुड़ी कई सिफारिशों का विवरण मिला है।
एक एक्सेल शीट में 40 उम्मीदवारों के नाम दर्ज पाए गए, जिनके सामने सिफारिशकर्ता के रूप में सुजीत बसु का नाम लिखा था। इसके अलावा अलग डिजिटल डेटा में करीब 150 भर्तियों की सिफारिशों का भी उल्लेख सामने आया है।
जांच एजेंसी का मानना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि भर्ती प्रक्रिया में चयन से पहले ही नाम तय हो जाते थे और सिफारिशें निर्णायक भूमिका निभाती थीं।
‘डमी कर्मचारी’ और वेतन भुगतान पर उठे सवाल
ईडी के एक वर्ग को शक है कि कुछ कर्मचारी केवल कागजों पर ही नियुक्त किए गए थे, लेकिन उन्हें नियमित वेतन मिलता रहा। अब एजेंसी यह जांच कर रही है कि ये कर्मचारी वास्तव में अपने कार्यस्थल पर जाते थे या नहीं।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर संदेह है। ईडी सेवा रिकॉर्ड और हाजिरी रजिस्टर की जांच कर रही है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
पारिवारिक नियुक्तियों से जांच और गहराई में पहुंची
जांच के दौरान एक नगर पालिका अधिकारी के बयान के आधार पर यह भी सामने आया है कि उनकी पत्नी को कमरहट्टी पालिका में क्लर्क पद पर और भाई को दक्षिण दमदम नगर पालिका में चपरासी के पद पर नियुक्त किया गया था।
ईडी का दावा है कि ये नियुक्तियां भी कथित सिफारिश प्रणाली से जुड़ी हुई हैं। इस संबंध में दस्तावेज अदालत में पेश किए जा चुके हैं और आगे पूछताछ की संभावना बनी हुई है।
ईडी का कहना है कि यह मामला केवल भर्ती अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित सिफारिश आधारित नेटवर्क की ओर इशारा करता है। ‘काउंसलर कोटा’ को इस पूरे ढांचे की एक अहम कड़ी माना जा रहा है और जांच अभी जारी है।