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कोलकाता में ‘उदंत मार्तंड’ द्वि-शताब्दी समारोह का आयोजन, हिंदी पत्रकारिता के इतिहास और भविष्य पर मंथन

फेक न्यूज और डिजिटल दौर की चुनौतियों के बीच प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता पर जोर।

By रजनीश प्रसाद

May 24, 2026 14:01 IST

कोलकाता : भारतीय भाषा परिषद में हिंदी पत्रकारिता के पहले समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ की द्वि-शताब्दी के अवसर पर भव्य समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य को लेकर गंभीर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि कोलकाता केवल हिंदी पत्रकारिता की जन्मभूमि ही नहीं, बल्कि उसकी गौरवभूमि भी है।

कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. कुसुम खेमानी का स्वागत वक्तव्य श्रीमती बिमला पोद्दार ने प्रस्तुत किया। वरिष्ठ लेखक और ‘वागर्थ’ पत्रिका के संपादक शंभुनाथ ने कहा कि हर बड़ी स्मृति पुनर्निर्माण की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि ‘उदंत मार्तंड’ का उद्देश्य वाक्य “हिंदुस्तानियों के हित के हेत” आज भी बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने डिजिटल मीडिया में बढ़ती झूठी और फर्जी खबरों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज भी पाठकों के बीच प्रिंट मीडिया अधिक विश्वसनीय माना जाता है।

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक ओम थानवी ने कहा कि हिंदी अखबार आज भी बड़े पैमाने पर पढ़े जाते हैं लेकिन मीडिया पर बढ़ते दबाव ने पत्रकारिता को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि कई बार यह समझना मुश्किल हो जाता है कि अखबार समाज के साथ खड़ा है या सरकार के।

सत्र का संचालन श्रद्धांजलि सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का कमजोर होना लोकतंत्र के कमजोर होने का संकेत है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए आशीष झुनझुनवाला ने कहा कि लोकतंत्र के प्रति अखबारों की जिम्मेदारी आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

दूसरे सत्र में वरिष्ठ पत्रकार गंगा प्रसाद ने कहा कि आज पत्रकारों को सकारात्मक खबरें लिखने के निर्देश दिए जाते हैं। उन्होंने पेड न्यूज के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र, रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के निदेशक जवाहर कर्णावट ने विदेशों में हिंदी पत्रकारिता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि विदेशी हिंदी पत्रकारिता भी हमेशा भारतीयों के हित की बात करती रही है और ‘सत्याग्रह’ शब्द ‘इंडियन ओपिनियन’ की देन है।

स्कॉटिश चर्च कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर गीता दूबे ने कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आज संकट के दौर से गुजर रहा है। वहीं खिदिरपुर कॉलेज की प्रोफेसर इतु सिंह ने पत्रकारिता में महिला पत्रकारों की बढ़ती भागीदारी पर प्रकाश डाला।

वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन ने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि पहले अखबार कमजोरों की आवाज हुआ करते थे लेकिन अब वे ताकतवर लोगों का पक्ष अधिक रखने लगे हैं। आरबीसी सांध्य कॉलेज की हिंदी प्रोफेसर कलावती ने इस सत्र का संचालन किया।

इस अवसर पर संयोजक संजय जायसवाल के संपादन में प्रकाशित पुस्तक ‘हिंदी पत्रकारिता: अतीत और भविष्य’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में घनश्याम सुगला और शालीन खेमानी भी उपस्थित रहे। सुशील कांति ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

शोध संवाद सत्र की अध्यक्षता डॉ. अभिज्ञात ने की। इस दौरान डॉ. मधु प्रभा सिंह, डॉ. सुषमा सिंह (पाटलिपुत्र कॉलेज, पटना), बृजेश प्रसाद (प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय), रूपल साव (विद्यासागर विश्वविद्यालय), प्रीतम रजक (कलकत्ता विश्वविद्यालय), पूर्णिमा हरि (कल्याणी विश्वविद्यालय) और रविकांत कुमार (विश्वभारती विश्वविद्यालय) ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। सत्र का संचालन लिली शाह ने किया।

सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के सदस्यों के तीन समूहों ने कविता कोलाज प्रस्तुत किया। इसमें डॉ. इतु सिंह, अनिता राय, श्रद्धांजलि सिंह, रामशंकर सिंह, मनीषा गुप्ता, नमिता जैन, सुशील पांडेय, पूजा गुप्ता, प्रमोद कुमार, टीना परवीन, इबरार खान, सुषमा कुमारी, सूर्य देव रॉय, विशाल कुमार साव, आदित्य तिवारी, कंचन भगत, आशुतोष राउत, अंजलि कुमारी, निधि सिंह, आदित्य पासवान, कुसुम भगत, स्वीटी महतो, संजय जायसवाल, अनुश्री साव, अंजलि साव, पूजा साव, पूजा कुमारी, सुष्मिता नायक, प्रिया गुप्ता, प्रतिभा साव, सन्नी साव, अरबाज खान, संतोष केवट, सुमित्रा, सोना, अनामिका, सुमन, प्रीति और सिमरन ने भाग लिया।

कार्यक्रम में देबजानी अदक एकेडमी फॉर डांस तथा प्रज्ञा झा और स्नेहा मिश्रा ने नृत्य प्रस्तुतियां दीं। वहीं आरिस्ता प्रकाश, राघव डागा और रौनक भट्टाचार्जी ने संगीत प्रस्तुति दी। सम्मान सत्र में श्री रामनिवास द्विवेदी, डॉ. मंजुरानी सिंह और डॉ. अवधेश प्रसाद सिंह ने शंभुनाथ का अभिनंदन किया। समारोह में कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साहित्य और संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

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