नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) संगठन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि संगठन ने अदालत की कार्यवाही के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियों का व्यावसायिक इस्तेमाल करते हुए उन्हें प्रचार, ब्रांडिंग और डिजिटल कमाई का माध्यम बना लिया।
यह याचिका अधिवक्ता राजा चौधरी की ओर से दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी गतिविधियां, कथित ट्रेडमार्क दावे, प्रचार अभियान और सोशल मीडिया पर मुद्रीकृत सामग्री यह संकेत देती है कि न्यायिक विवादों और अदालत की मौखिक टिप्पणियों का सुनियोजित तरीके से व्यावसायिक उपयोग किया गया।
याचिका के अनुसार इस व्यंग्यात्मक समूह का उदय उस समय हुआ जब एक सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कथित रूप से कुछ बेरोजगार युवाओं से जुड़े कार्यकर्ताओं और फर्जी डिग्री रखने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वकीलों को कॉकरोच और पैरासाइट जैसे शब्दों से संबोधित किया था।
इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी नामक समूह ने सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रियता हासिल की। खुद को आलसी और बेरोजगारों की आवाज बताने वाले इस संगठन के एक्स अकाउंट और वेबसाइट्स ने कथित तौर पर लगभग दो करोड़ ऑनलाइन फॉलोअर्स जुटा लिए थे। बाद में इन प्लेटफॉर्म्स को हटा दिया गया।
याचिका में दावा किया गया है कि इस तरह के प्रतीकात्मक अभियानों से संवैधानिक संस्थाओं की कार्यवाही का खतरनाक व्यावसायीकरण हो रहा है। अदालत में कही गई बातों को प्रचार, व्यापारिक गतिविधियों, डिजिटल मोबलाइजेशन और व्यावसायिक जुड़ाव के औजार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
अधिवक्ता राजा चौधरी ने अपनी याचिका में केवल कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ कार्रवाई की मांग ही नहीं की, बल्कि कथित फर्जी डिग्री के आधार पर वकालत करने वाले फर्जी वकीलों के मामले की स्वतंत्र जांच कराने की भी अपील की है। याचिका में सुझाव दिया गया है कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।