🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उथल-पुथल, हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी दुनिया की नजर

आईईए की चेतावनी—हॉर्मुज बंद रहा तो दुनिया पहुंच सकती है गंभीर ऊर्जा संकट में

नई दिल्ली : वैश्विक तेल संकट लगातार गहराता जा रहा है और अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य कब खुलेगा। ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में आए भारी व्यवधान ने दुनिया को असमंजस में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की चेतावनियों के बाद यह आशंका और बढ़ गई है कि स्थिति और गंभीर रूप ले सकती है।क्या अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की आशंका सही साबित होने जा रही है और क्या दुनिया “रेड ज़ोन” के संकट में फंसने वाली है—यही सवाल अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चर्चा का केंद्र बन गया है।

आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने पहले ही स्पष्ट किया था कि हालिया अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में जो कमी आई है, वह अब तक के इतिहास में सबसे गंभीर स्थितियों में से एक है। उनके अनुसार, वर्तमान में दुनिया को प्रतिदिन लगभग 1.4 करोड़ बैरल तेल का नुकसान हो रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए मार्च में एजेंसी ने अपने भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी किया था। लेकिन यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य जुलाई तक नहीं खुलता, तो यह आपूर्ति भी अपर्याप्त साबित हो सकती है और कई देश “रेड ज़ोन” में पहुंच सकते हैं।

“रेड ज़ोन” से तात्पर्य उस स्थिति से है, जहां किसी देश का रणनीतिक तेल भंडार इतना कम हो जाता है कि सामान्य मांग को पूरा करना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में केवल कीमतों में वृद्धि ही नहीं, बल्कि गंभीर आपूर्ति संकट भी उत्पन्न हो सकता है।

हालांकि बाजार विशेषज्ञों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि भारत इस गंभीर संकट से अपेक्षाकृत सुरक्षित रह सकता है। पिछले आठ दिनों में तीन बार तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। अंतिम चरण में शनिवार को देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 87 से 95 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई। कुल मिलाकर पिछले चार वर्षों के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगभग 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। जबकि दुनिया के कई देशों में 40 से 50 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ने के बावजूद स्थिति संभालना मुश्किल हो रहा है।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन जैसी कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार, भारत में वर्तमान में प्रति लीटर डीजल पर 25 से 30 रुपये और पेट्रोल पर 10 से 14 रुपये का नुकसान हो रहा है।

इस बीच राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि “मंहगाई के मुद्दे पर सरकार विफल रही है” और आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। पार्टी का कहना है कि जहां दुनिया के कई देश अपने नागरिकों के हितों की रक्षा कर रहे हैं, वहीं भारत सरकार तेल कंपनियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाए रखने की है। रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी ढील के कारण रूस से आपूर्ति जारी रह सकती है, लेकिन बढ़ती वैश्विक मांग के चलते कीमतें पहले से अधिक हो गई हैं। दूसरी ओर, वेनेजुएला कम कीमत पर तेल देने को तैयार है और इस पर बातचीत के लिए उसके कार्यवाहक राष्ट्रपति अगले सप्ताह भारत आने वाले हैं।

हालांकि यह भी स्पष्ट है कि वेनेजुएला भारत की कुल मांग के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में तेल उत्पादन करने में सक्षम नहीं है। यदि भारत केवल कीमत के कारण रूस से दूरी बनाता है तो इसका असर अन्य व्यापारिक समझौतों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति बेहद सावधानीपूर्वक तय करनी पड़ रही है ताकि वह वैश्विक दबावों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।

Articles you may like: