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भारत-अमेरिका ट्रेड डील विवाद: 500 अरब डॉलर खरीद प्रस्ताव पर उठे सवाल

अमेरिकी टैरिफ नीति और सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद बदला व्यापार समीकरण

नई दिल्ली : भारत के नागरिकों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए व्यापार समझौते की शर्तें तय की जाएंगी— यह स्पष्ट संदेश विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो को दिया है।

एस जयशंकर ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के अंतिम मसौदे पर भी विस्तार से चर्चा हुई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस दिशा में आगे की महत्वपूर्ण प्रगति जल्द ही देखने को मिलेगी, जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल एक बार फिर भारत का दौरा करेगा। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि किसी भी व्यापार समझौते में 140 करोड़ देशवासियों के हितों की रक्षा भारत सरकार की प्राथमिक शर्त होगी।

दूसरी ओर अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि अगले पांच वर्षों में भारत अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर (करीब 47.50 लाख करोड़ रुपये) मूल्य के उत्पाद खरीदने पर सहमत हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे अमेरिका से भारत को होने वाले निर्यात में पिछले पांच वर्षों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

एस जयशंकर ने बताया कि इस घोषणा के साथ ही दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से रुके हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौते के अंतिम मसौदे पर भी चर्चा हुई है। इस संबंध में आगे की कार्रवाई तब स्पष्ट होगी जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल फिर से भारत आएगा।

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम और द्विपक्षीय व्यापार समझौते की व्यावहारिकता को लेकर विशेषज्ञों के एक वर्ग ने सवाल उठाए हैं, जिनमें ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं। उनका कहना है कि केवल खरीद के आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि यह पूरा व्यापार किस संरचना और किस नीति ढांचे के तहत किया जाएगा।

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, 6 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ की प्रस्तावित दर 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति दी थी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति और भारतीय प्रधानमंत्री के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते का खाका सामने आया, जिसमें भारत द्वारा अमेरिका से अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर तक का आयात बढ़ाने की बात कही गई थी।

लेकिन कुछ सप्ताह बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी ट्रेड एक्ट के तहत सीधे 10 प्रतिशत शुल्क लागू कर दिया, जिसमें द्विपक्षीय बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई। इसी क्रम में मलेशिया ने भी अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक समझौते को समाप्त कर दिया।

इस स्थिति में यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीद के बदले भारत को क्या अतिरिक्त लाभ मिलेगा, क्योंकि इस पर न तो अमेरिकी पक्ष और न ही भारतीय पक्ष ने कोई विस्तृत जानकारी दी है। इसी कारण इस प्रस्ताव की व्यावहारिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। साथ ही यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या यह आंकड़ा केवल पहले से प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते का ही दोहराव है या फिर इसे नई सरकारी मंजूरी दी गई है।

इस बीच ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे पर एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो की मौजूदगी में स्पष्ट कहा कि भारत सरकार देशवासियों को सुरक्षित, निर्बाध और किफायती दरों पर ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है लेकिन भारत जैसे बड़े देश के लिए ऊर्जा आपूर्ति का विविधीकरण आवश्यक है ताकि किसी एक स्रोत पर निर्भरता से बचा जा सके।

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