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पेट्रोल-डीजल के उत्पाद शुल्क में कटौती कर केंद्र सरकार ने उठाया कितना नुकसान? वित्त मंत्री ने किया खुलासा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया है कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कटौती के कारण केंद्र सरकार को सालाना कितना राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

By Abhirup Datta, Moumita Bhattacharya

May 26, 2026 00:29 IST

कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उछाल के कारण घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। सोमवार (25 मई) तक पेट्रोल और डीजल के दामों में चार बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। इसकी वजह से आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से ही कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं।

चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश ईंधन आयात करता है, इसलिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी लगातार दबाव बना हुआ है। इसी बीच मार्च के अंत में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 10 रुपये की उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) कटौती की थी।

इस बाबत पहले ही बताया जा चुका है कि इसकी वजह से केंद्र सरकार के राजस्व में भारी कमी आने वाली है। सोमवार (25 मई) को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उस आंकड़े को स्पष्ट किया।

PTI की रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया है कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कटौती के कारण केंद्र सरकार को सालाना 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आम जनता को राहत देने के लिए ही यह कदम उठाया गया था।

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वित्त मंत्री ने बताया कि अगर उस समय शुल्क नहीं घटाया जाता तो आम जनता को तभी अधिक कीमत पर ईंधन खरीदना पड़ता। निर्मला सीतारमण ने कहा कि उस वक्त केंद्र सरकार ने महंगाई का दबाव खुद झेला था। अब जो कीमतें बढ़ रही हैं वह ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) द्वारा बढ़ाई जा रही हैं।

चूंकि ये कंपनियां कच्चा तेल खरीदकर उसे रिफाइन करके बेचती हैं, इसलिए कंपनियों की ओर से उत्पादन की लागत और खुदरा बाजार की कीमतों के अंतर को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर सोमवार (25 मई) को पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाकर 14 हजार करोड़ रुपये का राजस्व छोड़ दिया है। यह जानकारी मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने दी।

उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत के ईंधन आयात पर गंभीर असर पड़ा है। इसके बावजूद आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए गए हैं। सुजाता शर्मा ने बताया कि मई महीने में कई बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं। फिर भी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

नवभारत टाइम्स की मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पिछले 10 दिनों में चौथी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं। बताया जाता है कि पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल के दाम में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर पर पहुंच गई है।

आपके शहर में कितना हुआ पेट्रोल और डीजल का दाम?

मुंबई - पेट्रोल ₹111.21 प्रति लीटर, डीजल ₹97.83 प्रति लीटर

कोलकाता - पेट्रोल ₹113.51 प्रति लीटर, डीजल ₹99.82 प्रति लीटर

चेन्नई - पेट्रोल ₹107.77 प्रति लीटर, डीजल ₹99.55 प्रति लीटर

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