ओमान : हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच भारत ने अपने व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक रणनीति अपनानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में ओमान भारत के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक विकल्प और संभावित “मुस्किल आसान” के रूप में उभर रहा है।
भारत और ओमान के बीच आगामी 1 जून से मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) लागू होने जा रहा है। इसके बाद ओमान पश्चिम एशिया में भारत के लिए एक नया व्यापारिक केंद्र या वैकल्पिक प्रवेश द्वार बन सकता है, खासकर तब जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से समुद्री व्यापार प्रभावित होता है। ऐसे हालात में ओमान भारतीय निर्यातकों के लिए जोखिम कम करने का एक प्रमुख माध्यम साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर बाजारों में भारत का लगभग 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का व्यापार ओमान के माध्यम से स्थानांतरित या पुनर्निर्देशित किया जा सकता है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में भारत ने हॉर्मुज से जुड़े खाड़ी देशों को लगभग 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया था। इनमें से कई क्षेत्रों में ओमान पहले से ही अपनी मजबूत स्थिति बना चुका है।
जहाज निर्माण और समुद्री ढांचे से जुड़े उत्पादों में भारत ने लगभग 242 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया है, जिसमें से अकेले ओमान ने लगभग 60 मिलियन अमेरिकी डॉलर का आयात किया है और आने वाले समय में इस व्यापार के और बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा विद्युत ट्रांसफॉर्मर और इंसुलेटेड इलेक्ट्रिक कनेक्टिविटी जैसे बुनियादी ढांचे से जुड़े उत्पादों की मांग भी ओमान में बढ़ रही है।
दैनिक उपभोग और जीवनशैली से जुड़े उत्पादों के बाजार में भी ओमान की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। भारत ने इस क्षेत्र में 267 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के कॉस्मेटिक्स और पर्सनल केयर उत्पाद व्यापक हॉर्मुज़ क्षेत्र में निर्यात किए हैं, जिनमें से लगभग आधा हिस्सा केवल ओमान को गया है। इसके अलावा शॉल, परिधान, सिरेमिक टाइल्स, पैकेजिंग सामग्री, जूते के घटक और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों जैसे क्षेत्रों में भी ओमान की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।