नई दिल्लीः भारत के छोटे कारोबारों ने कोविड महामारी के बाद 2025 में सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज की। सीपीए ऑस्ट्रेलिया की एशिया-प्रशांत स्मॉल बिजनेस सर्वे 2025/26 में शामिल 80 प्रतिशत भारतीय छोटे व्यवसायों ने पिछले वर्ष कारोबार बढ़ने की बात कही, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र का औसत 63 प्रतिशत रहा। यह सर्वे नवंबर और दिसंबर 2025 के दौरान किया गया था। इसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 11 बाजारों के 4,166 छोटे कारोबारों की राय ली गई, जिनमें भारत के 513 व्यवसाय भी शामिल थे।
रिपोर्ट के मुताबिक 2026 को लेकर भी भारतीय एमएसएमई क्षेत्र काफी आशावादी है। करीब 87 प्रतिशत छोटे कारोबारियों को अगले साल अपने व्यवसाय में वृद्धि की उम्मीद है, जबकि 84 प्रतिशत ने स्थानीय अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन का अनुमान जताया। इससे भारत क्षेत्र के सबसे भरोसेमंद और सकारात्मक कारोबारी बाजारों में शामिल हो गया है।
सीपीए ऑस्ट्रेलिया के भारत में प्रवक्ता और सर्टिफाइड प्रैक्टिसिंग अकाउंटेंट अनिकेत तलाटी ने कहा कि सरकार की नीतियों, संरचित कारोबार को बढ़ावा देने वाले कदमों और मुक्त व्यापार समझौतों ने भारतीय एमएसएमई को मजबूती दी है। इन पहलों ने निर्यात बाजारों तक पहुंच आसान की और छोटे कारोबारों में विस्तार की नई उम्मीद पैदा की।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बढ़ती लागत अब भी कारोबारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। करीब 42 प्रतिशत कारोबारियों ने लागत बढ़ने को सबसे बड़ा जोखिम बताया। लगातार तीसरे साल कच्चे माल की महंगाई सबसे ज्यादा दबाव डालने वाला कारक बनी रही।
तलाटी ने कहा कि मार्च के बाद बढ़ी वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने कारोबारी माहौल को और अस्थिर बनाया है। सेवा क्षेत्र पर इसका असर सीमित रहा लेकिन विनिर्माण और निर्यात आधारित एमएसएमई को ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के साथ कमजोर ऑर्डर बुक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में रोजगार बढ़ने के संकेत भी सामने आए। 2025 में 52 प्रतिशत भारतीय छोटे कारोबारों ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जबकि 2026 में 69 प्रतिशत कंपनियां नई भर्तियां करने की योजना बना रही हैं। डिजिटल तकनीक अपनाने के मामले में भी भारतीय एमएसएमई तेजी से आगे बढ़े हैं। सर्वे के अनुसार, 89 प्रतिशत छोटे कारोबारों की कमाई का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा डिजिटल भुगतान के जरिए आया, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक है। वहीं 74 प्रतिशत कारोबारों ने ई-कॉमर्स से अपनी आय का 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा हासिल किया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI में निवेश भी तेजी से बढ़ा है। 2024 में जहां 26 प्रतिशत भारतीय छोटे कारोबार एआई में निवेश कर रहे थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 36 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, अब एआई एमएसएमई के लिए सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी निवेश क्षेत्र बन चुका है। करीब 41 प्रतिशत छोटे कारोबारों ने बिजनेस सलाह के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल किया, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 25 प्रतिशत था। कई कारोबारों ने माना कि तकनीकी निवेश से उनकी लाभप्रदता में सुधार हुआ है।
इसके साथ ही साइबर सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं। लगभग आधे भारतीय एमएसएमई ने बताया कि 2025 में साइबर घटनाओं के कारण उनके कामकाज में समय की हानि हुई। वहीं 50 प्रतिशत कारोबारों को आशंका है कि इस साल वे साइबर हमले का शिकार हो सकते हैं। तलाटी ने कहा कि AI नौकरी खत्म करने के बजाय कामकाज की क्षमता बढ़ाने वाला माध्यम बनेगा लेकिन डिजिटल अर्थव्यवस्था में सुरक्षित संचालन के लिए साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण को मजबूत करना जरूरी होगा।
रिपोर्ट के अनुसार बाहरी वित्तीय सहायता की मांग भी मजबूत बनी हुई है। 2025 में पांच में से चार भारतीय एमएसएमई ने बाहरी फंडिंग की जरूरत जताई। इनमें 69 प्रतिशत कारोबारियों ने कहा कि वे जीवित रहने के बजाय कारोबार विस्तार के लिए पूंजी जुटाना चाहते हैं।