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नक्सलमुक्त बस्तर में विकास की नई तस्वीर, सरकारी स्वास्थ्य अभियान से बुजुर्गों की आंखों की रोशनी लौटी

सुकमा के दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार। 1,500 मोतियाबिंद ऑपरेशन का लक्ष्य, 341 सफल सर्जरी पूरी।

By श्वेता सिंह

May 28, 2026 14:57 IST

सुकमाः कभी नक्सल हिंसा और मुठभेड़ों के कारण चर्चा में रहने वाला छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का पुवर्ती गांव अब बदलाव की नई तस्वीर पेश कर रहा है। इसी गांव के बुजुर्गों ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के तहत सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन कराकर अपनी आंखों की रोशनी वापस पाई है, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद जगी है।

यह वही क्षेत्र है, जिसे सरकार ने 31 मार्च 2026 को नक्सलमुक्त घोषित किया है। इसके बाद प्रशासन ने बस्तर संभाग के दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं की पहुंच को और अधिक मजबूत करने की दिशा में काम तेज कर दिया है।

जिला प्रशासन के अनुसार मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के तहत गंभीर और सामान्य दोनों तरह की बीमारियों के इलाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसमें मोतियाबिंद के साथ-साथ टीबी, कुष्ठ रोग, त्वचा संबंधी रोग, हीट स्ट्रोक, अस्थमा, विटामिन ए की कमी, एनीमिया और मलेरिया जैसे रोग शामिल हैं।

सुकमा के कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि जिले में मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए 1,500 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 341 मरीजों की सफल सर्जरी की जा चुकी है। वर्तमान में जिला अस्पताल में सप्ताह में तीन दिन इन ऑपरेशनों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को लाभ मिल सके।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अप्रैल से मई के बीच 40 मरीजों की दृष्टि सफलतापूर्वक वापस आई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार इस अभियान की निगरानी कर रही है ताकि इलाज की गुणवत्ता बनी रहे। ऑपरेशन के बाद मरीजों को भोजन, आवश्यक दवाइयां और देखभाल किट भी दी जा रही है, जिससे उनकी रिकवरी आसान हो सके।

इस अभियान के तहत दूरस्थ इलाकों जैसे पुवर्ती से छह मरीजों को जिला अस्पताल लाकर मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि कुल सात मरीजों को चिन्हित कर इलाज के लिए लाया गया था, जिन्हें उपचार के बाद सुरक्षित रूप से उनके गांव वापस भेज दिया गया।

अधिकारियों के अनुसार सीमित संसाधनों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हैं और दूरस्थ गांवों तक पहुंचकर मरीजों की पहचान कर रही हैं। इलाज के बाद मरीजों के चेहरे पर लौटती मुस्कान इस अभियान की सफलता को दर्शाती है।

यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रहा है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक विश्वास और विकास की नई नींव भी रख रहा है।

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