ओस्लो : नॉर्वे चेस 2026 में भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंद ने विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल शतरंज मुकाबले में हराकर एक बार फिर सनसनी फैला दी। यह जीत कई लोगों को 2024 के नॉर्वे चेस टूर्नामेंट की याद दिला गई, जब महज 18 वर्ष की उम्र में प्रज्ञानानंद ने पहली बार क्लासिकल फॉर्मेट में कार्लसन को शिकस्त दी थी।
दो वर्षों के भीतर काफी कुछ बदल चुका है। प्रज्ञानानंद के खेल में अब और अधिक परिपक्वता दिखाई देती है। दूसरी ओर, मैग्नस कार्लसन भी निजी जीवन में नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं और पिता बन चुके हैं। नॉर्वे चेस का आयोजन स्थल भी बदल गया है और इस बार प्रतियोगिता ओस्लो में हो रही है। लेकिन एक चीज नहीं बदली-प्रज्ञानानंद के खिलाफ कार्लसन का परिणाम। भारतीय युवा खिलाड़ी ने एक बार फिर दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी को मात देकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
इस मुकाबले में प्रज्ञानानंद सफेद मोहरों के साथ खेल रहे थे। शुरुआत से ही उन्होंने बेहद संयमित और रणनीतिक अंदाज में खेलते हुए मुकाबले की पकड़ धीरे-धीरे अपने हाथ में ले ली। हर चाल सोच-समझकर चली गई और कार्लसन पर लगातार दबाव बनाया गया। भारतीय ग्रैंडमास्टर की सधी हुई रणनीति के कारण खेल के मध्य चरण में कार्लसन मुश्किल स्थिति में फंसते नजर आए। जटिल परिस्थितियों में उलझने की समस्या उन्हें पहले भी परेशान कर चुकी है और इस मैच में भी वही कमजोरी सामने आई।
हालांकि मुकाबले के अंतिम चरण में खेल ने नाटकीय मोड़ लिया। समय के दबाव का फायदा उठाकर कार्लसन ने वापसी की कुछ संभावनाएं जरूर बनाई। कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि वह मुकाबले को बचा सकते हैं, लेकिन लगातार बढ़ते दबाव में आखिरकार उनसे एक बड़ी गलती हो गई। इसके बाद स्थिति पूरी तरह प्रज्ञानानंद के पक्ष में चली गई और कार्लसन के पास हार स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
मुकाबला समाप्त होने के बाद कार्लसन के चेहरे पर निराशा साफ दिखाई दे रही थी। कुछ क्षणों तक वह चुपचाप ऊपर देखते रहे और गहरी सांस लेते नजर आए। हालांकि आयोजकों के लिए राहत की बात यह रही कि इस बार उन्होंने गुस्से में कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी। 2024 में हार के बाद कार्लसन का शतरंज टेबल पर मुक्का मारना काफी चर्चा में रहा था, लेकिन इस बार ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला।
इस जीत के साथ प्रज्ञानानंद ओपन वर्ग की अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। नौ राउंड के बाद उनके खाते में अब 4.5 अंक हो चुके हैं। भारतीय खिलाड़ी का यह प्रदर्शन न केवल टूर्नामेंट में उनकी दावेदारी को मजबूत करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि विश्व शतरंज में भारत की नई पीढ़ी लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है।