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घुसपैठ के खिलाफ बड़ा एक्शन, बंगाल में शुरू हुआ डिटेंशन नेटवर्क

अवैध घुसपैठ पर सख्ती, संदिग्ध विदेशी नागरिकों के लिए अस्थायी केंद्रों का विस्तार।

By श्वेता सिंह

May 29, 2026 12:11 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग ने ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति के तहत पूरे राज्य में होल्डिंग सेंटर्स स्थापित करने का निर्देश जारी किया है। यह निर्णय मई 2026 में जारी आदेश के तहत लागू किया गया है।

निर्देश में राज्य के सभी 23 जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों को कहा गया है कि बांग्लादेशी या रोहिंग्या संदिग्धों की अस्थायी हिरासत और सत्यापन के लिए विशेष केंद्र तैयार किए जाएं।

संदिग्धों को 30 दिन तक हिरासत

इन होल्डिंग सेंटर्स में संदिग्ध व्यक्तियों को अधिकतम 30 दिनों तक रखा जाएगा। इस अवधि में उनकी पहचान की जांच, कानूनी प्रक्रिया और डिपोर्टेशन (देश वापसी) की तैयारी की जाएगी।

यह पूरी व्यवस्था केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाई गई है। पहले कुछ पुलिस जिलों में सीमित स्तर पर ऐसे केंद्र मौजूद थे, लेकिन अब इन्हें पूरे राज्य में लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

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वर्तमान में 11 केंद्र सक्रिय, 335 लोग हिरासत में

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार फिलहाल पश्चिम बंगाल में 11 होल्डिंग सेंटर्स कार्यरत हैं। इनमें सबसे अधिक सक्रिय केंद्र बासिरहाट पुलिस जिले में हैं, जहां तीन अलग-अलग स्थानों पर यह व्यवस्था चल रही है।

इन केंद्रों में कुल 335 लोग हिरासत में हैं, जिनमें 148 पुरुष, 99 महिलाएं, 88 बच्चे शामिल हैं।

मुर्शिदाबाद जिले में 19 संदिग्ध हिरासत में रखे गए हैं, जबकि अन्य केंद्रों में संख्या अपेक्षाकृत कम है।

कई जिलों में नए केंद्र शुरू

ताजा जानकारी के अनुसार मालदा और मुर्शिदाबाद में नए होल्डिंग सेंटर्स शुरू किए गए हैं, जहां शुरुआती चरण में 12 संदिग्धों को रखा गया है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

बारुईपुर, सुंदरबन, बनगांव, बारासात, जंगीपुर, कृष्णनगर, कूचबिहार और दक्षिण दिनाजपुर सहित कई जिलों में भी केंद्र सक्रिय किए जा चुके हैं। प्रशासन अब प्रत्येक जिले में कम से कम एक केंद्र स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

अस्थायी ढांचे में सुरक्षा व्यवस्था

कई जगहों पर कम्युनिटी हॉल और सरकारी भवनों को अस्थायी होल्डिंग सेंटर्स के रूप में उपयोग किया जा रहा है। इन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे, पुलिस सुरक्षा और भोजन व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

सरकार का कहना है कि इन केंद्रों का उद्देश्य अवैध घुसपैठ पर नियंत्रण और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।

सीमा क्षेत्रों में फर्जी दस्तावेजों की जांच तेज

बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में वोटर आईडी और पैन कार्ड जैसे दस्तावेजों के आधार पर रह रहे संदिग्धों की पहचान की जा रही है। इसके साथ ही जेल से रिहा किए गए विदेशी कैदियों को भी इन केंद्रों में रखने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि डिपोर्टेशन प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जा सके।

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के साथ समन्वय कर डिपोर्टेशन की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। प्रशासनिक रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्ध स्वेच्छा से सीमा की ओर लौट रहे हैं। मालदा के चंदन पार्क और मुर्शिदाबाद के लालगोला जैसे क्षेत्रों में पहले से ही केंद्र सक्रिय हैं।

सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर संतुलन की चुनौती

जहां सरकार इस अभियान को सुरक्षा और सत्यापन आधारित प्रक्रिया बता रही है, वहीं मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है कि इस दौरान निर्दोष लोग प्रभावित न हों। प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया दस्तावेज सत्यापन और कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से सीमा क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा दोनों मजबूत होंगे। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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