गांधीनगरः गुजरात के गिर सोमनाथ और अमरेली जिलों में संदिग्ध ‘बेबीसिया’ संक्रमण से शेर के शावकों की मौत के बाद वन विभाग ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। राज्य के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने गुरुवार को बताया कि प्रभावित इलाकों के 10 किलोमीटर दायरे में रहने वाले शेरों को अलग-थलग रखा जा रहा है, ताकि संक्रमण फैलने की आशंका को रोका जा सके।
मंत्री ने कहा कि जिन शावकों की मौत संदिग्ध संक्रमण के कारण हुई है, उनके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मोढवाडिया ने एक वीडियो संदेश में बताया कि जूनागढ़ वेटरिनरी कॉलेज के डॉक्टर और वन विभाग के फील्ड स्टाफ मिलकर प्रभावित क्षेत्र में निगरानी और उपचार का काम कर रहे हैं। संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने के लिए 10 किलोमीटर क्षेत्र के भीतर मौजूद शेरों को अलग रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को बुधवार को जानकारी दी गई थी कि संदिग्ध संक्रमण के कारण अब तक चार शेर शावकों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 17 शेरों को एहतियातन अलग रखा गया है।
मंत्री के अनुसार शेरों में दिखाई दे रहे लक्षणों के आधार पर इलाज और अन्य जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय से भी सीधे मार्गदर्शन मिल रहा है और मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए हैं।
वन मंत्री ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर मौतों की वजह ‘बेबीसिया’ संक्रमण मानी जा रही है, जो मुख्य रूप से किलनी (टिक) के जरिए फैलता है। इसी कारण गिर अभयारण्य और आसपास के क्षेत्रों में किलनी हटाने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही अन्य एहतियाती उपाय भी लागू किए गए हैं। वन विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सासन स्थित लायन हॉस्पिटल में फिलहाल भर्ती किसी भी शेर में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से व्यापक तैयारियां कर ली गई हैं। अस्पताल में चिकित्सा और लॉजिस्टिक सुविधाओं को मजबूत किया गया है। यदि किसी शेर में बेबीसिया संक्रमण पाया जाता है तो उसे तुरंत सुरक्षित स्थान पर लाने के लिए विशेष रेस्क्यू टीम और वाहन तैयार रखे गए हैं।
वन विभाग ने बताया कि बचाव कार्य के लिए अलग-अलग प्रकार के पिंजरे, जाल और अन्य जरूरी उपकरण उपलब्ध रखे गए हैं। शेर को सुरक्षित तरीके से बेहोश करने के लिए ट्रैंक्विलाइजर गन और उसकी सटीक डोज भी तैयार रखी गई है। इसके अलावा अस्पताल की अत्याधुनिक प्रयोगशाला में जांच और रिपोर्टिंग के लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण की तेजी से पहचान की जा सके।