नयी दिल्लीः ईरान और अमेरिका के बीच जंग के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह से बंद है। इस रास्ते से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और सप्लाई का सप्लाई होता, जिस पर मौजूदा समय में संकट छा गया है। इस ऊर्जा संकट के बीच भारत कई जहाजों को इस खतरनाक रास्ते से सुरक्षित निकालने में कामयाब रहा है। शिपिंग मंत्रालय के डायरेक्टर ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला क्रूड ऑयल टैंकर जिसका नाम निसोस केरोस है, वो 25-26 मई की रात को सुरक्षित होर्मुज स्ट्रेट को पार कर गया।
भारतीय कैसे पार कर रहे होर्मजु ?
ओपेश कुमार शर्मा ने बताया, 'यह जहाज लगभग 2,70,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आ रहा है और इसके 3 जून 2026 को विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है। इस जहाज के सभी क्रू मेंबर्स विदेशी हैं।' जहाजों के मूवमेंट से जुड़े सवाल पर शिपिंग मंत्रालय ने कहा, सुरक्षा कारणों से वे यह तो नहीं बता सकते कि ईरान के साथ तालमेल कैसे बिठाया जा रहा है, लेकिन यह पूरा काम विदेश मंत्रालय (MEA) के जरिए हो रहा है। कौन सा जहाज पहले निकलेगा, इसका फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय और उर्वरक (fertilizer) मंत्रालय के साथ मिलकर तय किया जाता है।
शिप ट्रैकिंग डेटा के सार्वजनिक होने पर उन्होंने कहा, 'ये कमर्शियल ऐप्स हैं जिन्हें कोई भी देख सकता है। कोई इसका क्या इस्तेमाल करता है यह उसकी नीयत पर निर्भर करता है, लेकिन फिलहाल यह डेटा जहाजों को ट्रैक करने में हमारी मदद कर रहा है। इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। भारतीय या विदेशी झंडे वाले किसी भी व्यापारिक जहाज पर किसी भारतीय नाविक के साथ कोई अप्रिय घटना होने की खबर नहीं है।'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हमारी जानकारी के अनुसार 11 भारतीय जहाज अभी भी फारसी खाड़ी क्षेत्र में हैं और 14 जहाज वापस आ चुके हैं। मेरा मतलब है कि वे फारसी खाड़ी में थे, लेकिन वे होर्मुज स्ट्रेट को पार करने में सफल रहे और भारत पहुंच गए हैं।'
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बताया कि पिछले 24 घंटों के भीतर 24 जहाजों ने ईरानी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किया है। इससे पहले बीते कल भी IRGC ने बताया था कि 24 घंटों के दौरान 26 व्यापारिक जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट को पार किया था।