नई दिल्ली: मुकेश अंबानी ने लगातार छठे साल रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) से कोई सैलरी नहीं ली। इसके उलट कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है। अब कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है। वह यह है कि जब रिलायंस के मुखिया छह साल से कोई सैलरी नहीं ले रहे हैं तो आखिर उनकी कमाई कैसे होती है ? दरअसल, रिलायंस के चेयरमैन अपनी ज्यादातर कमाई डिविडेंड और देश की सबसे मूल्यवान कंपनी में अपनी शेयरहोल्डिंग से करते हैं।
महामारी से शुरू हुआ सिलसिला अब भी नहीं टूटा
रिलायंस के सीएमडी मुकेश अंबानी ने एक बार फिर कंपनी से कोई सैलरी न लेने का फैसला किया है।
सैलरी न लेने का यह सिलसिला कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुआ था; यह अब भी बदस्तूर जारी है।
वित्त वर्ष 2025-26 लगातार छठा साल है जब दिग्गज बिजनेसमैन को रिलायंस इंडस्ट्रीज से कोई रिम्यूनरेशन या मेहनताना नहीं मिला है। वहीं, कंपनी ने रिकॉर्ड मुनाफा कमाकर भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों में अपनी जगह बनाए रखी है।
इस पूरे घटनाक्रम से लोगों के मन में एक आम सवाल उठता है। अगर मुकेश अंबानी ने लगातार छह साल तक सैलरी नहीं ली है तो इस दौरान उन्होंने रिलायंस से कितनी कमाई की ? यह कैसे होती है ?
वित्त वर्ष 2020-21 से नहीं ले रहे सैलरी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के ताजा एनुअल डिस्क्लोजर के मुताबिक, मुकेश अंबानी को वित्त वर्ष 2020-21 से कंपनी से कोई सैलरी, भत्ते, अतिरिक्त सुविधाएं, कमीशन, रिटायरमेंट बेनिफिट या स्टॉक ऑप्शन नहीं मिले हैं। कंपनी ने कन्फर्म किया है कि वित्त वर्ष 2025-26 लगातार छठा साल है जब उन्हें कोई मेहनताना नहीं मिला है।
यह फैसला सबसे पहले जून 2020 में लिया गया था। तब अंबानी ने महामारी के कारण हुई आर्थिक और सामाजिक उथल-पुथल को देखते हुए स्वेच्छा से अपना सैलरी पैकेज छोड़ दिया था। उन्होंने तभी से हर साल इस ट्रेंड को जारी रखा है।
कैसे होती है मुकेश अंबानी की कमाई ?
हालांकि, रिलायंस से अंबानी की सैलरी शून्य रही है। फिर भी वह कंपनी में अपनी हिस्सेदारी से शेयरधारकों को दिए जाने वाले डिविडेंड के जरिए कमाई करते रहते हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए रिलायंस ने प्रति शेयर 6 रुपये का डिविडेंड देने की घोषणा की। लगभग 1.61 करोड़ शेयरों की अपनी निजी हिस्सेदारी के आधार पर अंबानी ने रिलायंस से डिविडेंड के तौर पर लगभग 9.66 करोड़ रुपये कमाए।
इसके अलावा, अंबानी परिवार और प्रमोटर समूह के पास सामूहिक रूप से कंपनी में एक बड़ी हिस्सेदारी है। प्रमोटर समूह के पास लगभग 664.5 करोड़ शेयर हैं। इसने इस साल लगभग 3,987 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला।
हालांकि, अंबानी को पूरे छह साल की अवधि में हुई डिविडेंड से होने वाली कमाई सालाना डिविडेंड घोषणाओं और शेयरहोल्डिंग पैटर्न पर निर्भर करती है। लेकिन, ताजा आंकड़े यह बताते हैं कि उनकी दौलत मुख्य रूप से डिविडेंड और रिलायंस में उनकी शेयरहोल्डिंग की कीमत से जुड़ी है, न कि एग्जीक्यूटिव सैलरी से।
नीता अंबानी की सैलरी में भी इस दौरान बढ़ोतरी हुई। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज के बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव, नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हैं और चेयरमैन मुकेश अंबानी की पत्नी हैं। उनकी कुल सैलरी वित्त वर्ष 2016-17 में 1.39 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2017-18 में 1.56 करोड़ रुपये हो गई। इसमें सिटिंग फीस और कमीशन शामिल है।
प्रमोटरों की ऐसे होती है कमाई
बड़ी लिस्टेड कंपनियों के प्रमोटरों के लिए दौलत बनाने में सैलरी के मुकाबले शेयरों की हिस्सेदारी अक्सर कहीं ज्यादा अहम भूमिका निभाती है। रिलायंस के सबसे बड़े शेयरहोल्डर होने के नाते मुकेश अंबानी की नेट वर्थ काफी हद तक कंपनी के मार्केट वैल्यू और बिजनेस परफॉर्मेंस से जुड़ी है।
रिलायंस के शेयरों की कीमत में बढ़ोतरी, साथ ही नियमित डिविडेंड पेमेंट ने पिछले कुछ सालों में शेयरहोल्डरों की दौलत में काफी इजाफा किया है। इसका मतलब यह है कि सैलरी न लेने के बावजूद मुकेश अंबानी अपनी इक्विटी हिस्सेदारी के जरिए कंपनी की ग्रोथ से लगातार फायदा उठा रहे हैं।
मुकेश अंबानी का सैलरी न लेना क्यों खास ?
अंबानी का सैलरी न लेने का फैसला इसलिए भी खास है, क्योंकि यह रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए एक रिकॉर्ड-तोड़ साल के दौरान आया है।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 95,754 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया। यह उसका अब तक का सबसे ज्यादा सालाना प्रॉफिट है। रिलायंस ने साल का अंत लगभग 18.19 लाख करोड़ रुपये (लगभग 191.8 अरब डॉलर) के मार्केट कैपिटलाइजेशन के साथ किया। इससे भारत की सबसे कीमती कंपनियों में से एक के तौर पर उसकी हैसियत और मजबूत हुई है।