मनीला : आसियान के सदस्य देशों के नेता जून में रूस में होने वाले एक शिखर सम्मेलन में व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे। यह जानकारी शुक्रवार को फिलीपींस के शीर्ष राजनयिक ने दी।
थेरेसा लाजारो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से फोन पर बातचीत की, जिसमें आसियान के आगामी सम्मेलन को लेकर चर्चा हुई। यह सम्मेलन रूस के शहर कजान में 17 से 18 जून के बीच आयोजित किया जाएगा।
रूस का दूतावास ने बताया कि इस बैठक से पहले सर्गेई लावरोव और थेरेसा लाज़ारो के बीच बातचीत में रूस और आसियान के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
आसियान में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाईलैंड, पूर्वी तिमोर और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं।
अधिकांश आसियान देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस प्रस्ताव का समर्थन किया था, जिसमें रूस द्वारा 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर किए गए आक्रमण की निंदा की गई थी।
इसके बावजूद यह क्षेत्रीय संगठन रूस के साथ “संवाद साझेदार” के रूप में संबंध बनाए हुए है और नियमित उच्चस्तरीय बैठकों में रूसी अधिकारियों के साथ संवाद करता है।
फिलीपींस जैसे कुछ आसियान सदस्य देशों को संयुक्त राज्य अमेरिका के करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता है, जबकि कुछ अन्य देश चीन और रूस के साथ मजबूत व्यापार और सुरक्षा संबंध रखते हैं। वियतनाम और लाओस ने यूक्रेन पर हमले से संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव पर मतदान से परहेज किया था।
कई आसियान देशों—जिनमें फिलीपींस, इंडोनेशिया, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं—ने वैश्विक ईधन कीमतों में वृद्धि के बाद रूस से कच्चे तेल के आयात में रुचि दिखाई है या आयात किया है।
फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर भी इस शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते है यह जानकारी एक सरकारी अधिकारी ने दी।
हालांकि सिंगापुर के नेता के शामिल होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि सिंगापुर ने रूस की यूक्रेन पर कार्रवाई की निंदा की है और प्रतिबंध भी लगाए हैं।
म्यांमार के नेता के इस सम्मेलन में शामिल होने की संभावना कम है, क्योंकि आसियान ने 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार के शीर्ष नेताओं को उच्चस्तरीय बैठकों से बाहर रखा हुआ है।
आसियान ने 2021 में एक पांच सूत्रीय शांति योजना भी प्रस्तावित की थी, जिसमें तत्काल हिंसा और संघर्ष समाप्त करने की मांग की गई थी, लेकिन म्यांमार में अब तक हिंसा जारी है और संवाद स्थापित नहीं हो सका है।