कोलकाताः भारतीय जनता पार्टी के नेता दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में “ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार” फैला हुआ है। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी अब धीरे-धीरे पतन की ओर बढ़ रही है और संगठनात्मक रूप से कमजोर हो रही है।
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार किसी एक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी संरचना इससे प्रभावित है।
‘जनता के धन की खुली लूट’, नेताओं पर गंभीर आरोप
दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि टीएमसी नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लिए जारी धन का दुरुपयोग किया है। उनके अनुसार, यह पैसा जनता के हित के लिए था, लेकिन इसे “लूट” कर नेताओं ने निजी संपत्ति बनाने में इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा कि योजनाओं के नाम पर प्राप्त धन का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक नहीं पहुंचा और बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। उन्होंने आगे कहा कि टीएमसी की मौजूदा स्थिति चिंताजनक है और संगठन धीरे-धीरे बिखराव की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार, भ्रष्टाचार के कारण पार्टी के भीतर आंतरिक मजबूती कमजोर हो रही है।
योजनाओं और नागरिकता पर टिप्पणी
लक्ष्मी भंडार और अन्नपूर्णा भंडार जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि इन योजनाओं का लाभ पाने के लिए भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का हवाला देते हुए कहा कि यह उन हिंदू शरणार्थियों के लिए है जो बांग्लादेश और पाकिस्तान से भारत आए हैं और अभी तक नागरिकता प्राप्त नहीं कर पाए हैं।
उन्होंने कहा कि सभी पात्र लोगों को पंजीकरण कराकर सरकारी लाभ लेना चाहिए, अन्यथा नियमों के अनुसार गैर-नागरिकों को इन योजनाओं से वंचित किया जाएगा।
‘गैर-नागरिकों को बाहर करने की प्रक्रिया शुरू’
दिलीप घोष ने दावा किया कि गैर-नागरिकों को सरकारी योजनाओं से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जो लोग पात्रता शर्तें पूरी नहीं करते, उन्हें लाभ से वंचित किया जाएगा और उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई भी संभव है।
संस्थागत ढांचे और नौकरी घोटाले पर आरोप
राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कई संस्थानों को जानबूझकर विभाजित किया गया ताकि नौकरी घोटाले, रिश्वतखोरी और वित्तीय अनियमितताओं को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने कहा कि इसमें मंत्री और उनके सहयोगी शामिल हैं और यही वजह है कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं।
डेयरी उत्पादन और हरिंगहाटा का उदाहरण
उन्होंने हरिंगहाटा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां मदर डेयरी का उत्पादन पहले प्रतिदिन लगभग छह लाख लीटर था, जो अब घटकर लगभग तीस हजार लीटर रह गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ‘बांग्ला डेयरी’ जैसी संस्थाएं भी कथित रूप से भ्रष्टाचार और धन के दुरुपयोग का माध्यम बन गई हैं।
दिलीप घोष ने अंत में कहा कि टीएमसी की पूरी व्यवस्था भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है और यह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता का भी संकेत है।