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सीबीएसई OSM टेंडर विवाद: राहुल गांधी का आरोप-“COEMPT के लिए नियम बदले गए”, पारदर्शिता पर सवाल

डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के टेंडर प्रक्रिया पर विवाद गहराया, राहुल गांधी ने छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगाया।

By श्वेता सिंह

May 29, 2026 17:00 IST

नई दिल्लीः लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष कंपनी को अनुबंध देने के लिए तकनीकी मानकों में बार-बार ढील दी गई।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए दावा किया कि सीबीएसई ने तीन बार टेंडर जारी किए, लेकिन शुरुआती दो चरणों में कोई योग्य बोली नहीं आई।

‘COEMPT के लिए नियम बदले गए’-गंभीर आरोप

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि तीसरे चरण में तकनीकी मानक इतने घटा दिए गए कि कंपनी COEMPT बोली प्रक्रिया में सफल हो गई। उन्होंने कहा कि स्कैनिंग रेजोल्यूशन के मानक घटाए गए, रोबोटिक स्कैनर की शर्त हटाई गई और CMMI सर्टिफिकेशन को लेवल 5 से घटाकर लेवल 3 कर दिया गया। राहुल गांधी के अनुसार, उत्तर पुस्तिकाओं में गलतियों पर जुर्माने की शर्त भी हटा दी गई, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और छात्रों की शिकायतें

राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि भारत की बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) तीसरे दौर में भी योग्य पाई गई थी, लेकिन अंततः अनुबंध COEMPT को दिया गया। उन्होंने कहा कि छात्रों को गलत स्कैनिंग, पेज गायब होने और खराब मूल्यांकन पोर्टल जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। राहुल गांधी के अनुसार, शिक्षकों ने भी चेतावनी दी थी कि OSM प्रणाली को बिना तैयारी के पूरे देश में लागू नहीं किया जाना चाहिए।

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न्यायिक जांच की मांग और राजनीतिक बयानबाजी

राहुल गांधी ने इस मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है और कहा कि यह केवल प्रक्रिया का मामला नहीं बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 18.5 लाख छात्रों का भविष्य एक ऐसी कंपनी को सौंप दिया गया जिसकी क्षमता पर सवाल हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को जवाब देना चाहिए कि यह निर्णय किस आधार पर लिया गया।

CBSE का पक्ष भी सामने आया

इससे पहले सीबीएसई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि सोशल मीडिया पर जो URL साझा किया जा रहा है, वह वास्तविक मूल्यांकन पोर्टल नहीं है, बल्कि टेस्टिंग साइट है। सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि वास्तविक पोर्टल सुरक्षित है और किसी भी छात्र का डेटा लीक नहीं हुआ है।

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