नई दिल्ली : वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी अनिश्चितता का असर अब भारत के औद्योगिक और उत्पादन क्षेत्रों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। रूस-यूक्रेन संघर्ष और उसके बाद ईरान से जुड़े हालातों के कारण अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में पैदा हुई अस्थिरता का प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ रहा है, यह असर और अधिक स्पष्ट होता जा रहा है।
ऐसी स्थिति में औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। बजट योजना से पहले पहली बार केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों और कारखानों में सीधे जाकर जमीनी हालात का आकलन करने की पहल शुरू की है। इस अभियान का उद्देश्य उद्योग जगत की वास्तविक समस्याओं, चुनौतियों और अपेक्षाओं को सीधे समझकर भविष्य की आर्थिक नीतियों और बजट को अधिक व्यावहारिक बनाना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस पहल के तहत केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में टीमों को भेजा जा रहा है। इन टीमों में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे, जो सीधे उद्योगपतियों से संवाद करेंगे।
इस योजना के तहत बुनियादी ढांचे की कमी, जटिल नियम-कानून, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, वित्तीय संसाधनों की कमी, कुशल श्रमिकों की अनुपलब्धता और तकनीकी उपयोग से जुड़ी समस्याओं सहित कई पहलुओं पर विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा गठित प्रत्येक टीम में अतिरिक्त सचिव, संयुक्त सचिव या निदेशक स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। ये पांच सदस्यीय टीमें देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में दो से तीन दिन का दौरा करेंगी और उद्योगपतियों के साथ सीधे संवाद करेंगी।
इस सर्वेक्षण के दायरे में केवल उत्पादन क्षेत्र ही नहीं, बल्कि रोजगार, अनुसंधान और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी शामिल की गई हैं। हर दौरे में कम से कम दो स्टार्टअप कंपनियों से बातचीत करना भी अनिवार्य किया गया है।
सरकार ने इस प्रक्रिया में उद्योग जगत से समन्वय स्थापित करने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ को जिम्मेदारी सौंपी है, जो सरकारी प्रतिनिधियों और उद्योगपतियों के बीच संपर्क स्थापित करेगा।