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NEET-UG पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, NTA में सुधार और जवाबदेही पर केंद्र से विस्तृत हलफनामा मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने NTA की परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने, विशेषज्ञ ढांचा तैयार करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से छह हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

By श्वेता सिंह

May 29, 2026 17:43 IST

नई दिल्लीः NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को बड़ा निर्देश दिया। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि सरकार यह स्पष्ट करे कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में परीक्षा संचालन को हर साल संस्थागत रूप से मजबूत करने के लिए कौन-सा तंत्र तैयार किया जा रहा है।

कोर्ट ने केंद्र को छह सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया, जिसमें यह बताया जाए कि NTA में विशेषज्ञों की नियुक्ति और व्यवस्था को कैसे बेहतर बनाया जा रहा है।

‘संस्थागत मेमोरी’ और सुधार ढांचे पर फोकस

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि NTA के भीतर ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए जिससे “संस्थागत मेमोरी और विशेषज्ञता” बनी रहे। इसका मतलब है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सुधार होता रहे और अनुभव आधारित एक मजबूत ढांचा तैयार किया जाए। पीठ ने कहा कि सुधार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि जमीन पर दिखाई देने चाहिए ताकि भविष्य में परीक्षा विवाद दोबारा न हों।

केंद्र का पक्ष और कोर्ट के सवाल

सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस पूरे मामले की निगरानी स्वयं प्रधानमंत्री कर रहे हैं। हालांकि, इस पर अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब नियमित बैठकें और उच्च स्तरीय निगरानी की जा रही है, तो फिर इतनी बड़ी खामियां कैसे सामने आ गईं।

कोर्ट ने पूछा, “इतनी निगरानी के बावजूद यह चूक कैसे हुई?” NTA और हाई पावर्ड कमेटी की ओर से बताया गया कि लगभग 60 सिफारिशें दी गई थीं, जिनमें से कई लागू हो चुकी हैं और बाकी को NEET-UG 2026 से पहले लागू किया जाएगा।

छात्रों की चिंता और अगली सुनवाई

अदालत ने NTA की जवाबदेही पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होगी, तब तक सुधार प्रभावी नहीं हो सकता। पीठ ने कहा कि “बिखरी हुई जिम्मेदारी अंततः सरकार पर आकर ठहरती है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि सुधार व्यक्तियों पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर केंद्रित होने चाहिए, ताकि संस्थाएं स्थिर और मजबूत बनी रहें।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार-बार होने वाली परीक्षा गड़बड़ियों का छात्रों और उनके परिवारों पर गहरा मानसिक असर पड़ता है, क्योंकि इसमें वर्षों की मेहनत जुड़ी होती है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में तय की है और कहा है कि वह इस पूरे मुद्दे पर आगे भी निगरानी जारी रखेगी।

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