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Lohagarh Fort : शिवाजी महाराज से जुड़ा है महाराष्ट्र के लोहागढ़ किले का इतिहास, यहां रखते थे मुगलों से लूटा हुआ खजाना

जिन लोगों को ट्रेकिंग का शौक है और प्रकृति को करीब से देखना पसंद करते हैं, ऐसे लोग लोहागढ़ किले की चढ़ाई पर जरूर जाते हैं।

By Moumita Bhattacharya

Jun 28, 2026 17:24 IST

पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की हत्या के बाद से महाराष्ट्र का लोहागढ़ किला काफी चर्चाओं में आ गया है। आरोप है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर केतन को लोहागढ़ किले से 400 फीट नीचे धक्का दे दिया था।

यह किला समुद्रतल से करीब 3400 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। क्या आप जानते हैं कि 18वीं सदी में बने इस किले का संबंध शिवाजी महाराज के साथ ही विदर्भ के शासकों से भी रहा है!

जिन लोगों को ट्रेकिंग का शौक है और प्रकृति को करीब से देखना पसंद करते हैं, ऐसे लोग लोहागढ़ किले की चढ़ाई पर जरूर जाते हैं।

लोहागढ़ किले पर रहा है कई राजवंशों का अधिकार

इतिहासकारों से मिली जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के लोनावला में मौजूद लोहागढ़ किले में अलग-अलग समय विभिन्न राजवंशों का अधिकार रहा है। इतिहासकारों के अनुसार 1648 में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस किले पर अपना कब्जा जमा लिया था।

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हालांकि 1665 में जब पुरंदर की संधि हुई थी तब यह किला उन्होंने मुगलों को सौंप दिया था। लेकिन साल 1670 में उन्होंने फिर से इस किले पर अपना अधिकार कर लिया था।

शिवाजी का कोषागार

लोहागढ़ किला उन चुनिंदा किलों में से एक माना जाता है जिनका शिवाजी के जीवन में महत्व रहा है। कहा जाता है कि शिवाजी इस किले का इस्तेमाल अपने खजाने को सुरक्षित रखने के लिए करते थे। खासतौर पर यहां उस खजाने को सुरक्षित रखा गया था जिसे उन्होंने सूरत से लूटा था। इतिहासकारों के मुताबिक मुगलों का व्यापारिक केंद्र होने की वजह से शिवाजी ने उसे दो बार लूटा था।

दरअसल, मुगल जब भी किसी गांव पर हमला करते थे, तब वह वहां की प्रजा को काफी नुकसान पहुंचाते थे। लूटपाट के अलावा वे तोड़फोड़ भी काफी किया करते थे। इसलिए मुगलों को सबक सिखाने के लिए शिवाजी महाराज ने दो बार सूरत को लूटा था और वहां से लूटा हुआ खजाना उन्होंने लोहागढ़ किले में ही सुरक्षित रखा था।

लोहागढ़ किले के शिखर तक जाने वाली सीढ़ियां Image : X

ट्रेकिंग के लिए है पसंदीदा

लोहागढ़ का किला पुणे से करीब 55 किलोमीटर और लोनावला से 12 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। ट्रेकिंग के लिए यह किला खूब पसंद किया जाता है। इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले पर्यटकों के साथ-साथ रोमांचप्रेमी ट्रेकर भी लोहागढ़ किले पर घूमने के लिए जरूर आते हैं।

किले के सबसे ऊपरी शिखर तक पहुंचने के लिए 250 से 300 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। ये सीढ़ियां खड़ी चट्टानों को काटकर बनायी गयी है। इस वजह से इस चढ़ाई को पूरी करने में 2 घंटे तक का समय भी लग सकता है।

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कैसे पहुंचे और कौन सा है बेस्ट समय?

लोहागढ़ के किले पर घूमने जाने के लिए सबसे अच्छा समय मानसून और सर्दियों के मौसम को माना जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह किला सुबह 10 से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। किले में प्रवेश निःशुल्क है और सप्ताह के सभी दिन यह किला खुला रहता है।

अगर आप भी लोहागढ़ किला घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो इसका सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड लोनावला है। स्टेशन से टैक्सी कर लोहागढ़ वाडी गांव आना पड़ता है जहां से किले की चढ़ाई शुरू होती है।

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