अगर आपको लद्दाख की खूबसूरत वादियों से होकर बहने वाली पवित्र सिंधु नदी के दर्शन करना हैं तो बिहार सरकार द्वारा दी जा रही इस योजना का लाभ जरूर उठाएं। बिहार का पर्यटन विभाग सिंधु दर्शन योजना के तहत ₹20 हजार की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
हालांकि इसके लिए एक शर्त का पालन करना बेहद जरूरी है। वित्तीय सहायता के लिए आवेदन करना वाले श्रद्धालु को बिहार का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
क्या है सिंधु दर्शन योजना?
बिहार का पर्यटन विभाग वहां के मूल निवासियों को लद्दाख जाकर सिंधु नदी के दर्शन करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। यह वित्तीय सहायता यात्रा पर हुए खर्च का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम ₹20 हजार प्रति व्यक्ति की होगी।
इन दोनों में से जो कम होगा, वहीं वित्तीय सहायता के रूप में प्रदान किया जाएगा। बता दें, लद्दाख की यात्रा को काफी खर्चीला माना जाता है। इसलिए वित्तीय समस्याओं की वजह से लोग पवित्र सिंधु नदी के दर्शन करने नहीं जा पाते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए बिहार सरकार ने यह फैसला लिया है।
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किसे मिलेगा यह लाभ?
वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए कुछ शर्तों का पालन करना अनिवार्य है :-
- आवेदक का बिहार का मूल निवासी होना अनिवार्य है।
- तीर्थयात्री की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
- हर साल राज्य सरकार अधिकतम 100 तीर्थ यात्रियों को इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
सिंधु दर्शन और पूजा करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी/फाइल फोटो Image : ANI
कैसे करेंगे आवेदन?
वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए आवेदन आपको यात्रा पूरी करने के बाद करनी होगी। ध्यान रहे, यात्रा के टिकट, होटल का बिल और अन्य बिल को संभाल कर रखें ताकि आवेदन करते समय सबूत के तौर पर उन्हें पेश कर सकें।
सिंधु दर्शन योजना के तहत आवेदन करने के लिए आवश्यक सभी दस्तावेजों के साथ बिहार के पर्यटन विभाग में आवेदन कर सकते हैं। अधिकारी दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही इस बात का निर्धारण करेंगे कि श्रद्धालु को कितनी वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए। एक बार अनुमोदन मिल जाने के बाद सहायता राशि सीधे आपके बैंक अकाउंट में भेज दिया जाएगा।
क्या सिंधु दर्शन का महत्व?
बता दें, सिंधु दर्शन एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जिसे हर वर्ष लेह-लद्दाख के पवित्र सिंधु नदी के तट पर आयोजित किया जाता है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सिंधु नदी को भारत की सभ्यता, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान के तौर पर चिह्नित करना है। बड़ी संख्या में हिंदु श्रद्धालु इस मौके पर एकत्र होकर विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।