नई दिल्ली: पेपर लीक विवाद के कारण रद्द की गई नीट-यूजी 2026 परीक्षा की पुनर्परीक्षा रविवार को देशभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित की गई। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अनुसार भारत और विदेशों में निर्धारित केंद्रों पर 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, जिनमें बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन, सीसीटीवी निगरानी, जैमर और दो स्तरीय तलाशी व्यवस्था शामिल थी।
एनटीए ने बताया कि पुनर्परीक्षा भारत के 5,440 केंद्रों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई। परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी सहित कुल 13 भाषाओं में कराई गई। एजेंसी के अनुसार इस विशाल परीक्षा आयोजन को केवल एनटीए ने नहीं, बल्कि विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, सुरक्षा एजेंसियों और संस्थानों के सहयोग से "टीम भारत" के रूप में संपन्न कराया गया।
37 दिनों में हुआ विशाल आयोजन
एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि पेपर लीक विवाद के बाद इतनी बड़ी परीक्षा को मात्र 37 दिनों में दोबारा आयोजित करना पूरे सरकारी तंत्र के सहयोग से संभव हो पाया। उन्होंने बताया कि परीक्षा के संचालन के लिए देशभर में लगभग 7 लाख अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, पर्यवेक्षकों और परीक्षा कर्मियों को लगाया गया था। एनटीए ने प्रश्नपत्रों के कई सेट तैयार करने में देशभर के शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों के सहयोग की भी सराहना की।
शिक्षा मंत्री ने लिया तैयारियों का जायजा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली के ओखला स्थित एनटीए मुख्यालय पहुंचकर परीक्षा की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार एनटीए ने मंत्री को परीक्षा के सुचारु और पारदर्शी संचालन के लिए किए गए तकनीकी और प्रशासनिक प्रबंधों की जानकारी दी।
दिव्यांग और विशेष जरूरत वाले छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था
एनटीए ने बताया कि 10,000 से अधिक दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा 81 ऐसे अभ्यर्थियों के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए जिन्हें चिकित्सकीय समस्याएं थीं। इनमें सड़क दुर्घटना में घायल एक छात्र और कीमोथेरेपी से गुजर रहे एक अन्य छात्र भी शामिल थे। एजेंसी के अनुसार इन छात्रों को वर्षों की तैयारी के बाद परीक्षा से वंचित न होना पड़े, इसके लिए विशेष प्रबंध किए गए।
सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय निगरानी तंत्र
परीक्षा केंद्रों पर आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन, सीसीटीवी निगरानी, मोबाइल जैमर और राज्य पुलिस की सहायता से दो स्तरीय तलाशी व्यवस्था लागू की गई। राष्ट्रीय स्तर पर एनटीए और शिक्षा मंत्रालय में कमांड एवं कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए। इसके अलावा उच्च शिक्षा विभाग के 34 केंद्रीय वित्तपोषित संस्थानों, सभी राज्यों तथा जिला कलेक्टर कार्यालयों में भी सीसीटीवी निगरानी केंद्र बनाए गए।
फर्जी प्रवेश पत्र और प्रतिरूपण के कुछ मामले सामने आए
अभिषेक सिंह ने बताया कि कुछ स्थानों पर गलत प्रवेश पत्र लेकर आने, फर्जी प्रवेश पत्र प्रस्तुत करने और दूसरे की जगह परीक्षा देने के प्रयास जैसे मामले सामने आए। कुछ अभ्यर्थियों ने मोबाइल फोन अंदर ले जाने की कोशिश भी की, लेकिन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें ऐसा करने में सफलता नहीं मिली। संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई की गई है।
विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों का सहयोग
एनटीए ने बताया कि परीक्षा संचालन में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, विदेश मंत्रालय, डाक विभाग, भारतीय वायु सेना, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, रक्षा मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और विभिन्न बैंकों ने सहयोग किया। भारतीय स्टेट बैंक, केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और यूको बैंक भी इस प्रक्रिया का हिस्सा रहे। राज्य सरकारों ने भी छात्रों और अभिभावकों के लिए पानी, भोजन, छाया, एम्बुलेंस और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की।
कई राज्यों में छात्रों को मिली अतिरिक्त सहायता
मुंबई में बेस्ट कर्मचारियों की हड़ताल के बावजूद छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के लिए विशेष बस सेवाएं चलाई गईं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अनुसार 63 परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए 24 मार्गों पर 60 बसें लगाई गईं और करीब 180 विशेष फेरे संचालित किए गए। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता से लौटने के बाद आईजीआई हवाई अड्डे से अपने आवास की यात्रा में विलंब किया ताकि नीट अभ्यर्थियों को यातायात प्रतिबंधों के कारण परेशानी न हो।
कोलकाता में सड़क दुर्घटना में घायल छात्रा सृष्टि दुबे को अलग कमरे में परीक्षा देने की अनुमति दी गई। उसके लिए चिकित्सा सहायता और एम्बुलेंस की व्यवस्था भी की गई। धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं छात्रा के अभिभावकों से बातचीत की, जिन्होंने एनटीए और प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
ड्रेस कोड को लेकर भी विवाद
राजस्थान के अजमेर में कुलसुम बानो नामक एक अभ्यर्थी ने आरोप लगाया कि बुर्का पहनने के कारण उसे परीक्षा केंद्र में प्रवेश देने से रोका गया। उसने कहा कि पिछली परीक्षा में भी उसने यही परिधान पहना था। बाद में एनटीए ने स्पष्ट किया कि संबंधित अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दे दिया गया था। अहमदाबाद में तलाशी के दौरान कुछ छात्रों से कंठी हटाने को कहे जाने पर अभिभावकों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि हिजाब पहनने वाली छात्राओं को अनुमति दी जा रही है जबकि हिंदू धार्मिक धागों को हटाने को कहा जा रहा है। बाद में पुलिस ने एनटीए के ड्रेस कोड नियमों की जानकारी देकर मामला शांत कराया।
पेपर लीक जांच और विरोध प्रदर्शन जारी
पेपर लीक मामले की जांच अभी भी जारी है। इस बीच अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली नवगठित "कॉकरोच जनता पार्टी", जिसकी शुरुआत ऑनलाइन अभियान के रूप में हुई थी, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन कर रही है।
गुजरात में ड्रोन से निगरानी
गुजरात में 211 परीक्षा केंद्रों पर लगभग 79,400 अभ्यर्थियों ने पुनर्परीक्षा दी। राज्य पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त बलों के साथ ड्रोन निगरानी भी की।