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'गुरु दोखी' विवाद के बीच अकाल तख्त का बड़ा कदम, जारी किया भगवंत मान की पेशी का वीडियो

भगवंत मान ने आरोपों को बताया था झूठा प्रचार, वीडियो की जांच कराने की जताई थी सहमति

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 20, 2026 19:18 IST

अमृतसर: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। अकाल तख्त ने शनिवार को मुख्यमंत्री की जनवरी 2026 में हुई पेशी का वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ सामने आए कथित वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताते हुए इसकी जांच कराने की इच्छा जताई थी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब 15 जून को अकाल तख्त द्वारा जारी आदेश के बाद इस मुद्दे पर विवाद लगातार बना हुआ है। अकाल तख्त ने हाल ही में मान को कथित वीडियो प्रकरण को लेकर ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया था।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत उस समय हुई थी जब अकाल तख्त ने जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया था। उन पर ‘गुरु की गोलक’ (गुरुद्वारों के दान पात्र) को लेकर कथित टिप्पणियां करने तथा एक वीडियो में सिख गुरुओं और मारे गए उग्रवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ कथित रूप से आपत्तिजनक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे। इन्हीं आरोपों के संबंध में 15 जनवरी को भगवंत मान अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश हुए थे।

पेशी के दौरान क्या बोले थे भगवंत मान?

अकाल तख्त द्वारा जारी बयान के अनुसार पेशी के दौरान मुख्यमंत्री ने संबंधित वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताया था। उन्होंने कहा था कि वीडियो की जांच कराई जानी चाहिए और वह इसके लिए फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के पते भी उपलब्ध करा सकते हैं। मान ने उस समय कहा था कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दौर है और केवल उनके ही नहीं बल्कि कई अन्य लोगों के भी AI की मदद से तैयार किए गए वीडियो सामने आ चुके हैं। उन्होंने वीडियो को अपने खिलाफ चलाया जा रहा झूठा प्रचार करार दिया और कहा कि इसका उद्देश्य उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना है।

अकाल तख्त जत्थेदार ने क्या कहा था?

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने मुख्यमंत्री से दो सरकारी फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के नाम देने को कहा था, जहां वीडियो की जांच कराई जा सके। बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने उस समय जांच कराने पर सहमति व्यक्त की थी। जत्थेदार ने कहा था कि मामला सिख गुरुओं से जुड़ा हुआ है और यदि वीडियो फर्जी भी निकले, तब भी किसी व्यक्ति के चरित्र हनन को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा था कि वीडियो असली है या नकली, इसका निर्णय केवल वैज्ञानिक फोरेंसिक जांच के बाद ही किया जा सकता है।

जांच को लेकर क्या हुई थी बातचीत?

बयान के अनुसार मान ने जत्थेदार से कहा था कि उनकी पसंद की किसी भी फोरेंसिक प्रयोगशाला में, उनकी निगरानी में जांच कराई जा सकती है और इसके लिए आवश्यक व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद जत्थेदार ने मुख्यमंत्री से पूछा था कि क्या उन्होंने पहले से इस वीडियो की जांच करवाई है। जवाब में मान ने कहा था कि उनके पास अदालत का ऐसा आदेश है जिसमें वीडियो को ही झूठा बताया गया है। इस पर जत्थेदार ने कहा था कि उन्होंने अदालत का आदेश पढ़ा है और उसमें वीडियो की जांच कराने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने दोहराया था कि यदि जत्थेदार चाहें तो वह फोरेंसिक जांच कराने के लिए तैयार हैं।

फोरेंसिक जांच के परिणाम पर जत्थेदार की टिप्पणी

अकाल तख्त के बयान के मुताबिक इसके बाद जत्थेदार ने कहा था कि यदि फोरेंसिक जांच में वीडियो असली पाया जाता है, तो अगला निर्णय खालसा पंथ द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से एक बार फिर दो फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के नाम देने के लिए कहा था। हालांकि अकाल तख्त का दावा है कि आज तक मुख्यमंत्री की ओर से ऐसे किसी भी प्रयोगशाला का नाम उपलब्ध नहीं कराया गया है।

विपक्ष लगातार कर रहा है इस्तीफे की मांग

वीडियो विवाद और अकाल तख्त के आदेश के बाद विपक्षी दल लगातार मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री हालांकि लगातार यह कहते रहे हैं कि संबंधित वीडियो फर्जी है और AI तकनीक की मदद से तैयार किया गया है। उनका कहना है कि इसकी निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।

अकाल तख्त का हालिया आदेश

15 जून को अमृतसर में अकाल तख्त ने इस मामले पर अपना आदेश जारी किया था। इसके बाद सोमवार को अकाल तख्त ने भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया। इसी आदेश के बाद यह विवाद और अधिक राजनीतिक तथा धार्मिक चर्चा का विषय बन गया है। अब अकाल तख्त द्वारा जारी वीडियो को इस पूरे प्रकरण में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में देखा जा रहा है।

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