नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर से पहले भारत में स्थित रूसी दूतावास ने शनिवार को नई दिल्ली में एक विशेष योग सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में रूस के राजनयिकों और अन्य गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। आयोजन के दौरान रूस में योग की बढ़ती लोकप्रियता और दुनियाभर में इसके प्रसार को लेकर चर्चा हुई।
रूसी दूतावास की संस्कृति मामलों की काउंसलर यूलिया अर्यायेवा ने कहा कि योग भारत की ओर से दुनिया को दिया गया एक अनमोल उपहार है। उन्होंने बताया कि रूस में योग को लेकर लोगों में काफी उत्साह है और कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग इसका अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के लोग योग को और बेहतर तरीके से समझने के लिए भारत की यात्रा भी करते हैं।
रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव की पत्नी डायना अलीपोवा ने योग सत्र की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें योग का अभ्यास करना पसंद है, क्योंकि यह शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की स्थापना में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
डायना अलीपोवा ने रूस के प्रमुख शहरों जैसे मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में योग की लोकप्रियता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि योग स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है और हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट योग करने की कोशिश करनी चाहिए।
कार्यक्रम में भारत की पूर्व विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी भी शामिल हुईं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले रूसी दूतावास की ओर से आयोजित इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि रूस और भारत ऐतिहासिक मित्र देश हैं और दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं।
मीनाक्षी लेखी ने योग को भारत की ओर से दुनिया को मिली विरासत और उपहार बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभालने के बाद योग के महत्व को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने को प्राथमिकताओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी खुद योग का अभ्यास करते हैं और लोगों को भी इससे जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब देश सकारात्मक सोच और वैश्विक विरासत को बढ़ावा देने के लिए साथ आते हैं, तो यह भारत के लिए गर्व की बात है।
लाइफ योग की योग प्रशिक्षक प्रज्ञा सिंह ने कहा कि उन्हें गर्व है कि योग भारत से निकला और आज पूरी दुनिया के लिए एक उपहार बन चुका है। उन्होंने कहा कि योग का नियमित अभ्यास जीवन में खुशी और सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने लोगों से अपने व्यस्त समय में से कुछ समय निकालकर योग करने की अपील की, ताकि जीवन के कई पहलुओं में सुधार हो सके।
संयुक्त राष्ट्र ने 11 दिसंबर 2014 को 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया था। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस प्रस्ताव के बाद हुई थी, जिसे उन्होंने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र के उद्घाटन भाषण के दौरान रखा था।
इसके बाद दुनिया में समग्र स्वास्थ्य को लेकर एक नई सोच को बढ़ावा मिला, जिसमें इलाज के बजाय बीमारी से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा। वर्ष 2015 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पहले आयोजन के बाद से भारत ने आयुष मंत्रालय के नेतृत्व में दुनियाभर में इसके आयोजन का नेतृत्व किया है। इसमें राज्य सरकारों, विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का भी सहयोग मिलता रहा है।
वर्ष 2026 अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का 12वां वर्ष है। इस वर्ष के आयोजन की थीम "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग" (Yoga for Healthy Ageing) रखी गई है। इसका उद्देश्य यह बताना है कि योग सभी आयु वर्ग के लोगों को सक्रिय, आत्मनिर्भर और स्वस्थ जीवन जीने में मदद कर सकता है।