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TMC में नया सियासी संकट: ज्योतिप्रिय मल्लिक के बाद अब गौतम देव के इस्तीफे से हड़कंप

सिलीगुड़ी नगर निगम मेयर पद और पार्टी पदों से किनारा, संगठनात्मक खींचतान और बढ़ी।

By श्वेता सिंह

Jun 20, 2026 01:54 IST

सिलीगुड़ीः पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल एक बार फिर तेज हो गई है। इस्तीफों का सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब पूर्व मंत्री और सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देव ने इस्तीफा देकर संगठन के भीतर हलचल बढ़ा दी है। इससे पहले पूर्व खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने भी शारीरिक कारणों का हवाला देकर पार्टी छोड़ दी है।

गौतम देव ने मेयर पद छोड़ा, राजनीतिक बदलाव का दिया संकेत

गौतम देव ने गुरुवार रात सिलीगुड़ी नगर आयुक्त को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके साथ ही उन्होंने मेयर पद से अपने इस्तीफे की पुष्टि कर दी, जिससे उनके इस कदम को लेकर पिछले दो दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया।

देव ने कहा कि बदलते राजनीतिक हालात और जनता के जनादेश में आए बदलाव को देखते हुए उनके लिए मेयर पद पर बने रहना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा राजनीतिक ढांचे के साथ तालमेल बैठाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा था।

ज्योतिप्रिय मल्लिक ने स्वास्थ्य कारणों से छोड़े पार्टी पद

इससे पहले पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने भी पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है।

पार्टी नेतृत्व को भेजे पत्र में मल्लिक ने कहा कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है और वे अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शारीरिक स्थिति खराब होने के कारण पार्टी जिम्मेदारियों को निभाना अब संभव नहीं रह गया है।

टीएमसी के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान

इन इस्तीफों को टीएमसी के भीतर चल रही आंतरिक हलचल से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी पहले से ही संगठनात्मक स्तर पर असंतोष और गुटबाजी की चुनौतियों से जूझ रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी में विधायकों और सांसदों के बीच अलग-अलग स्तर पर असंतोष की स्थिति बनी हुई है, जिससे संगठनात्मक स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।

दोहरी राजनीतिक चुनौती से घिरी टीएमसी

टीएमसी इस समय एक साथ दो मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है। एक ओर पश्चिम बंगाल में 58 विधायकों के एक गुट की गतिविधियां चर्चा में हैं, जिसका नेतृत्व निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी से जुड़ा बताया जा रहा है।

दूसरी ओर लोकसभा में 20 सांसदों के एक समूह की गतिविधियां भी पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं, जिनसे जुड़े विवादों में काकोली घोष दस्तिदार का नाम भी सामने आता है।

राजनीतिक अस्थिरता के बीच बढ़ता इस्तीफों का दौर

पार्टी के भीतर लगातार सामने आ रहे इस्तीफे और गुटबाजी की खबरों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। विधानसभा चुनाव के बाद से संगठनात्मक ढांचे में बदलाव और असंतोष के संकेत लगातार सामने आते रहे हैं, जो अब और स्पष्ट होते दिख रहे हैं।

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