कोलकाताः पश्चिम बंगाल दिवस के अवसर पर राज्यपाल डॉ. आर. एन. रवि ने राज्य के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि बंगाल ने भारत के बौद्धिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय जागरण में निर्णायक भूमिका निभाई है और अब उसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में भी अग्रणी बनना होगा। उन्होंने कहा कि यह भूमि केवल अतीत की गौरवगाथा नहीं, बल्कि भविष्य की विकास यात्रा की मजबूत आधारशिला भी है।
राज्यपाल ने अपने कार्यालय द्वारा जारी वीडियो संदेश में राज्यवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल दिवस राज्य के गठन की स्मृति के साथ-साथ उसकी समृद्ध परंपराओं और राष्ट्र निर्माण में योगदान को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि साहित्य, संगीत, कला, शिक्षा, विज्ञान, अध्यात्म और सामाजिक सुधार के हर क्षेत्र में बंगाल ने देश को दिशा दी है।
उन्होंने बंगाल को “विचारों का स्रोत और राष्ट्रीय प्रेरणा की भूमि” बताते हुए कहा कि भारत के आधुनिक स्वरूप को गढ़ने में इस राज्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उनके अनुसार बंगाल का इतिहास भारत के जागरण, संघर्ष और पुनरुत्थान की कहानी से गहराई से जुड़ा हुआ है।
पुनर्जागरण से आधुनिक भारत तक का सफर
राज्यपाल ने बंगाल पुनर्जागरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आंदोलन ने देश में बौद्धिक चेतना, सामाजिक सुधार और आत्मविश्वास की नई लहर पैदा की। इसी दौर ने आधुनिक भारत की सोच को आकार दिया और समाज में प्रगतिशील बदलावों की नींव रखी।
उन्होंने चैतन्य महाप्रभु, राजा राममोहन राय और ईश्वरचंद्र विद्यासागर जैसे समाज सुधारकों को याद करते हुए कहा कि इन महान विभूतियों ने शिक्षा, समानता और मानवीय गरिमा को मजबूत करने में ऐतिहासिक योगदान दिया।
इसके साथ ही उन्होंने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का स्मरण किया, जिनका “वंदे मातरम्” स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा बना, और रवीन्द्रनाथ ठाकुर का उल्लेख करते हुए कहा कि “जन गण मन” ने भारत की विविधता में एकता की भावना को सशक्त रूप दिया।
राज्यपाल ने स्वामी विवेकानंद, श्री अरविंद, जगदीश चंद्र बोस, प्रफुल्ल चंद्र राय, सुभाष चंद्र बोस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान व्यक्तित्वों के योगदान को भी याद किया और कहा कि इन सभी ने भारत के विचार, विज्ञान और राष्ट्र निर्माण की दिशा को मजबूत किया।
विभाजन की पीड़ा और एकता का संदेश
अपने संबोधन में उन्होंने विभाजन की त्रासदी का भी उल्लेख किया और कहा कि पश्चिम बंग दिवस केवल गौरव का ही नहीं, बल्कि उस दर्द की भी याद दिलाता है जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए थे। उन्होंने कहा कि उस कठिन दौर से मिली सीख आज भी राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और उनके सहयोगियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके प्रयासों के कारण पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा बना रहा। यह ऐतिहासिक भूमिका आज भी राष्ट्र की एकता को मजबूत करने का संदेश देती है।
विकसित भारत 2047 में बंगाल की भूमिका
राज्यपाल ने कहा कि भारत जब विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब बंगाल को फिर से अपनी ऐतिहासिक भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि जिस भूमि ने भारत के जागरण का नेतृत्व किया, वही भूमि अब देश के परिवर्तन और विकास की यात्रा में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने कहा कि आज का बंगाल नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और उद्यमशीलता का बेहतर उपयोग कर रहा है। लंबे समय से सीमित अवसरों के बावजूद अब राज्य नई संभावनाओं की ओर बढ़ रहा है।
राज्यपाल ने युवाओं, किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों, पेशेवरों और विद्वानों से अपील की कि वे राज्य के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं और सामूहिक प्रयासों से बंगाल को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।