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लेबनान में बढ़ी जंग की आंच से अटकी अमेरिका-ईरान वार्ता, युद्धविराम पर भी संशय बरकरार

इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष ने बढ़ाई मुश्किलें। स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित बातचीत स्थगित, परमाणु समझौते और क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया पर उठे सवाल।

By श्वेता सिंह

Jun 19, 2026 21:43 IST

यरुशलमः दक्षिणी लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तेज होती सैन्य झड़पों के चलते अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित वार्ता शुक्रवार को स्थगित कर दी गई। इस घटनाक्रम ने हाल में हुए अंतरिम समझौते और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की कोशिशों को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।

हालांकि बाद में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम पर सहमति बनने की खबर भी सामने आई। क्षेत्रीय मामलों से जुड़े दो अधिकारियों और एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार कतर, अमेरिका और ईरान की मध्यस्थता से संघर्ष विराम का रास्ता निकला। हालांकि आधिकारिक स्तर पर इसकी तत्काल पुष्टि नहीं की गई।

हिजबुल्लाह के एक अधिकारी ने बताया कि मध्यस्थों ने नया युद्धविराम लागू कराने की कोशिश की है और जल्द औपचारिक घोषणा हो सकती है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि समझौता पूरी तरह लागू हो चुका है या नहीं। दूसरी ओर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी।

इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा कि सेना को सरकार की ओर से कोई नया निर्देश नहीं मिला है। उनके अनुसार इजराइली बल अग्रिम रक्षा क्षेत्र में अपनी कार्रवाई जारी रखे हुए हैं और फिलहाल अभियान में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

स्विट्जरलैंड नहीं पहुंचे ईरानी प्रतिनिधि

सूत्रों के अनुसार ईरानी अधिकारियों ने स्विट्जरलैंड की यात्रा रद्द कर दी और स्पष्ट किया कि जब तक लेबनान में लड़ाई नहीं रुकती, तब तक वार्ता आगे नहीं बढ़ सकती। इसी बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी अपनी स्विट्जरलैंड यात्रा स्थगित कर दी।

व्हाइट हाउस ने प्रारंभिक तौर पर इसे लॉजिस्टिक कारणों से जोड़ा था, लेकिन बाद में सामने आया कि क्षेत्रीय सुरक्षा हालात ने भी निर्णय को प्रभावित किया। ईरानी पक्ष का कहना है कि इजरायल की सैन्य गतिविधियों के बीच बातचीत शुरू करना उचित नहीं होगा।

संघर्ष में बढ़ा जान-माल का नुकसान

इजरायली सेना ने रातभर दक्षिणी और पूर्वी लेबनान में कई ठिकानों पर हमले किए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई। वहीं इजरायल ने दावा किया कि लेबनान सीमा के निकट एक टैंक पर हुए हमले में उसके चार सैनिक मारे गए, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी शामिल था। एक विस्फोटक ड्रोन हमले में पांच अन्य सैनिक घायल हुए।

इसके बाद इजरायल ने नबातियेह और आसपास के इलाकों में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। बाद में पूर्वी लेबनान की बेका घाटी में भी हमले किए गए। स्थानीय मीडिया के अनुसार डौरिस गांव भी हमलों की चपेट में आया।

युद्धविराम उल्लंघन को लेकर दोनों पक्षों के आरोप

इजरायल ने हिजबुल्लाह पर युद्धविराम का खुला उल्लंघन करने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल अपने सैनिकों या क्षेत्र पर हमले बर्दाश्त नहीं करेगा और इसके लिए हिजबुल्लाह को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

वहीं हिजबुल्लाह ने इजराइली टैंकों को निशाना बनाने की जिम्मेदारी स्वीकार की और कहा कि उसकी कार्रवाई इजराइल द्वारा किए गए उल्लंघनों की प्रतिक्रिया थी। संगठन के अनुसार इजरायली सैनिक नबातियेह के ऊपर स्थित रणनीतिक अली अल-ताहेर पहाड़ी की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके जवाब में हमला किया गया।

संघर्ष के कारण दक्षिणी लेबनान के कई गांवों से लोगों को पलायन करना पड़ा। स्थानीय निवासी मुस्तफा जैन ने बताया कि हालात इतने खराब हो गए कि परिवार के साथ गांव छोड़ना पड़ा।

दक्षिणी लेबनान में इजरायली मौजूदगी बना विवाद का कारण

युद्धविराम के बावजूद दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्सों में इजरायली सैन्य मौजूदगी एक बड़ा विवाद बना हुआ है। ईरान का कहना है कि इजरायल को इन इलाकों से हटना चाहिए, जबकि नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि जब तक सुरक्षा जरूरतें बनी रहेंगी, सेना तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में मौजूद रहेगी।

इस मुद्दे ने अमेरिका और इजरायल के बीच भी मतभेद बढ़ाए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल के महीनों में नेतन्याहू की नीतियों को लेकर अधिक आलोचनात्मक रुख अपनाते दिखे हैं। वहीं इजराइल के भीतर भी सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।

परमाणु कार्यक्रम पर होनी है अगली बड़ी बातचीत

स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित वार्ता का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर आगे बढ़ना था। ईरान लगातार दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) का कहना है कि ईरान के पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिसे वह चाहे तो कई परमाणु बम बनाने में इस्तेमाल कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बातचीत बेहद जटिल होगी। वर्ष 2015 के परमाणु समझौते को अंतिम रूप देने में 18 महीने से अधिक समय लगा था। मौजूदा अंतरिम समझौते में वार्ताकारों को 60 दिनों के भीतर नया परमाणु समझौता तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है, हालांकि जरूरत पड़ने पर समयसीमा बढ़ाई जा सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुला, लेकिन नई शर्तें लागू

अंतरिम समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार बुधवार रात इस मार्ग से 1.25 करोड़ बैरल से अधिक तेल का परिवहन हुआ।

इसके बावजूद ऊर्जा बाजार पूरी तरह सामान्य होने में अभी कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है। ईरान की नई समुद्री प्राधिकरण व्यवस्था ने जहाजों के लिए पंजीकरण संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि भविष्य में इस मार्ग के उपयोग के लिए नई शुल्क व्यवस्था लागू हो सकती है।

हालांकि ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अंतरिम समझौते की 60 दिन की अवधि के दौरान सुरक्षा, पर्यावरण और बीमा से जुड़े शुल्क जहाज मालिकों से नहीं लिए जाएंगे और इनका वहन ईरानी सरकार करेगी।

ईरान को मिली कुछ अहम रियायतें

अंतरिम समझौते के बाद अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटा दी है और उसे तेल निर्यात की अनुमति दी है। इसके अलावा समझौते में ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने का भी प्रावधान है, हालांकि यह प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ेगी, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है।

समझौते में यह भी उल्लेख है कि यदि ईरान नया परमाणु समझौता करने में सफल रहता है तो उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा सकता है। साथ ही युद्ध के बाद पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर का विशेष कोष स्थापित करने का प्रस्ताव भी शामिल है।

फिलहाल लेबनान में जारी तनाव ने कूटनीतिक प्रयासों की रफ्तार धीमी कर दी है। ऐसे में क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत अब युद्धविराम की स्थिरता पर काफी हद तक निर्भर करेगी।

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