मुंबई: पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड, सूचीबद्ध कंपनियों और वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है। इन कदमों का मकसद कारोबार को आसान बनाना, निवेश प्रक्रिया को तेज करना और निवेशकों के हितों को और मजबूत करना है।
मुंबई में हुई सेबी बोर्ड की 214वीं बैठक में म्यूचुअल फंडों को दिनभर के नकदी असंतुलन से निपटने के लिए इंट्राडे उधारी लेने की अनुमति दी गई। इसके अलावा कंपनियों के लिए ओपन मार्केट बायबैक का रास्ता फिर से खोला गया है। वहीं एआईएफ के लिए नई योजनाएं शुरू करने की प्रक्रिया को भी आसान और तेज बनाया गया है।
म्यूचुअल फंड अब ले सकेंगे इंट्राडे उधार
सेबी ने म्यूचुअल फंड नियमों में संशोधन करते हुए फंड हाउसों को दिन के दौरान होने वाली अस्थायी नकदी जरूरतों के लिए अल्पकालिक उधारी लेने की अनुमति दी है। यह सुविधा भुगतान और प्राप्ति के समय में अंतर, विदेशी मुद्रा लेनदेन के निपटान, डेरिवेटिव सौदों के भुगतान और अन्य अस्थायी नकदी जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी।
हालांकि सेबी ने साफ किया है कि इस उधारी का उपयोग अतिरिक्त जोखिम लेने या लीवरेज बढ़ाने के लिए नहीं किया जा सकेगा। परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) को यह सुनिश्चित करना होगा कि लिया गया कर्ज उसी कारोबारी दिन के भीतर चुका दिया जाए।
सेबी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सुविधा मौजूदा उधारी सीमा से अलग होगी। फिलहाल म्यूचुअल फंड योजनाएं अपनी शुद्ध परिसंपत्तियों के 20 प्रतिशत तक उधार ले सकती हैं, लेकिन यह व्यवस्था केवल निवेशकों के रिडेम्प्शन भुगतान के लिए है।
1 अगस्त 2026 से लौटेगा ओपन मार्केट बायबैक
सेबी ने शेयरों की पुनर्खरीद (बायबैक) से जुड़े नियमों में भी बदलाव को मंजूरी दी है। इसके तहत 1 अगस्त 2026 से कंपनियां शेयर बाजार के जरिए ओपन मार्केट बायबैक फिर से कर सकेंगी। इससे पहले कंपनियां मुख्य रूप से टेंडर ऑफर और बुक-बिल्डिंग जैसे तरीकों से बायबैक करती थीं। नए नियम लागू होने के बाद स्टॉक एक्सचेंज के जरिए भी शेयरों की खरीद संभव होगी।
सेबी का मानना है कि इससे कंपनियों को अधिक विकल्प मिलेंगे, प्रक्रिया आसान होगी और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।
बायबैक के लिए तय हुईं नई शर्तें
नए नियमों के तहत ओपन मार्केट बायबैक को 66 कार्यदिवस के भीतर पूरा करना होगा। साथ ही बायबैक के लिए तय कुल राशि का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित अवधि के पहले आधे हिस्से में खर्च करना अनिवार्य होगा।
सेबी का कहना है कि इससे बायबैक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
एआईएफ के लिए GARUDA व्यवस्था लागू
सेबी ने वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) के लिए ‘गारुड़ा’ (GARUDA) नामक नई व्यवस्था को भी मंजूरी दी है। इसका पूरा नाम ‘ग्रीन-चैनल: एआईएफ रोलआउट अपॉन डॉक्यूमेंट एक्नॉलेजमेंट’ है। इसका उद्देश्य एआईएफ के जरिए जुटाई गई पूंजी को तेजी से निवेश में लगाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
गारुड़ा व्यवस्था लागू होने के बाद सामान्य एआईएफ के लिए नई योजनाएं शुरू करने की समयसीमा घटाकर 10 कार्यदिवस कर दी गई है। वहीं केवल मान्यता प्राप्त निवेशकों के लिए बनाई गई योजनाओं और एंजेल फंडों को पंजीकरण या जरूरी दस्तावेज जमा करने के तुरंत बाद लॉन्च किया जा सकेगा।
बाजार को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी के इन फैसलों से पूंजी बाजार की कार्यकुशलता बढ़ेगी। म्यूचुअल फंडों को नकदी प्रबंधन में अधिक सुविधा मिलेगी, कंपनियों को बायबैक के लिए अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे और एआईएफ क्षेत्र में निवेश की रफ्तार बढ़ेगी। साथ ही निवेशकों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है।