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ईंधन कीमतों और मानसून के जोखिम से बढ़ सकती है महंगाई, मुद्रास्फीति पर सतर्क रहना होगा : आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा

रेपो दर बरकरार रखने के फैसले पर बोले संजय मल्होत्रा, फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति।

By रजनीश प्रसाद

Jun 19, 2026 19:27 IST

नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि आने वाले समय में मुद्रास्फीति (महंगाई) की दिशा पर लगातार नजर बनाए रखना आवश्यक होगा। उन्होंने विशेष रूप से मई में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में हुए संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके कारण आगामी महीनों में ईंधन आधारित महंगाई बढ़ सकती है।

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के कार्यवृत्त में संजय मल्होत्रा ने कहा कि निकट भविष्य में खाद्य वस्तुओं की कीमतों का परिदृश्य फिलहाल अनुकूल दिखाई देता है लेकिन अल नीनो के कारण कमजोर मानसून की आशंका बढ़ने से जोखिम भी बढ़ गया है। यदि मानसून प्रभावित होता है तो इसका असर खाद्य महंगाई पर पड़ सकता है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने 5 जून को घोषित अपनी नीति में रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया था। गवर्नर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में “वेट एंड वॉच” यानी इंतजार और निगरानी की रणनीति अपनाना अधिक उपयुक्त है। इसी सोच के तहत उन्होंने नीतिगत ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं करने और तटस्थ रुख बनाए रखने के पक्ष में मतदान किया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया के बदलते भू-राजनीतिक हालात और संभावित कमजोर मानसून को देखते हुए मौद्रिक नीति के फैसले अत्यंत सावधानी से लेने होंगे। इन दोनों कारकों का सीधा प्रभाव महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है।

मौद्रिक नीति समिति ने वर्ष 2026-27 के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है जबकि तीसरी तिमाही में इसके 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। वहीं चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को अप्रैल में घोषित 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है।

संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई और विकास दर के अनुमानों में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति कितनी गंभीर होती है और मानसून की तीव्रता व भौगोलिक विस्तार कैसा रहता है, यह भविष्य की आर्थिक स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि 2026-27 के लिए शीर्ष स्तर की मुद्रास्फीति आरबीआई की सहनशीलता सीमा के ऊपरी स्तर के आसपास रहने का अनुमान है, लेकिन कोर मुद्रास्फीति 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यदि धातुओं की कीमतों को इसमें शामिल न किया जाए तो कोर मुद्रास्फीति इससे भी कम रहती है। उनके अनुसार अप्रैल की नीति समीक्षा की तुलना में अब महंगाई के अनुमान में जो वृद्धि हुई है, उसका मुख्य कारण खाद्य और ईंधन क्षेत्र है, जो आपूर्ति पक्ष से प्रभावित कारक हैं और जरूरी नहीं कि इनका असर व्यापक रूप से सभी क्षेत्रों में फैल जाए।

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