पेरिसः भारत वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में एक निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखता है और दुनिया में मौजूद तकनीकी असमानता को कम करने का मजबूत आधार उसके पास है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित ‘वीवा टेक्नोलॉजी 2026’ कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। उन्होंने भारत की जनसांख्यिकीय ताकत, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, सस्ती डिजिटल सेवाओं और तकनीकी प्रतिभा को देश की सबसे बड़ी पूंजी बताया।
कार्यक्रम के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की औसत आयु 30 वर्ष से कम है, जिससे देश को ऊर्जा, नवाचार और नए विचारों से भरपूर युवा शक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण भारत में आर्थिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, जो नवाचार और तकनीकी विकास को गति देती हैं।
उन्होंने कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाला भारत केवल एक बड़ा बाजार ही नहीं, बल्कि विशाल मांग पैदा करने वाला देश भी है। यही मांग भारत को बड़े पैमाने पर उत्पादन और सेवाओं की क्षमता प्रदान करती है, जिससे ‘इकोनॉमी ऑफ स्केल’ का लाभ मिलता है और तकनीकी समाधान व्यापक स्तर पर विकसित किए जा सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने भारत की डिजिटल क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में डेटा की लागत दुनिया के कई देशों की तुलना में बेहद कम है। इसके साथ ही डेटा सेंटरों, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की डिजिटल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध है। उनके अनुसार यह स्थिति भारत को वैश्विक तकनीकी निवेश और डिजिटल विस्तार के लिए एक अनुकूल गंतव्य बनाती है।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिभा तैयार करने वाले देशों में शामिल है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष लगभग 14 लाख विद्यार्थी इन विषयों में स्नातक होकर निकलते हैं, जो देश की तकनीकी और नवाचार क्षमता को लगातार मजबूत बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि युवा जनसंख्या, विशाल बाजार, कम लागत वाला डेटा, पर्याप्त ऊर्जा संसाधन और बड़ी तकनीकी कार्यशक्ति जैसे कारक मिलकर भारत को दुनिया के लिए एक अत्यंत आकर्षक साझेदार बनाते हैं। यही कारण है कि भारत वैश्विक तकनीकी खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए एक संदेश में पीयूष गोयल ने कहा कि भारत दुनिया के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभर रहा है। उन्होंने लिखा कि युवा और प्रतिभाशाली आबादी, किफायती डेटा, लगातार बढ़ती क्षमताएं और साझा विकास की सोच भारत को तकनीकी प्रगति के अग्रणी देशों की पंक्ति में खड़ा करती है।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत केवल अपने हितों तक सीमित नहीं सोचता। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया के कई देश भारत के लिए परिवार की तरह हैं और ‘ग्लोबल साउथ’ के विकास को भारत अपनी सामूहिक जिम्मेदारी मानता है। उनके अनुसार भारत की सोच तकनीकी प्रगति के लाभों को व्यापक रूप से साझा करने और विकासशील देशों को आगे बढ़ाने की है।
पीयूष गोयल ने विश्वास जताया कि अपनी वर्तमान क्षमताओं और भविष्य की संभावनाओं के बल पर भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक तकनीकी विकास का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के बीच मौजूद तकनीकी अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।