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AI अपनाने की रफ्तार तेज, कंपनियां ढूंढ़ रहीं क्रियान्वयन में माहिर विशेषज्ञ

रिपोर्ट में खुलासा, AI प्रयोग से आगे बढ़कर व्यवसाय संचालन, वित्त और ग्राहक सेवाओं में तकनीक लागू करने के लिए बढ़ी विशेषज्ञों की मांग। भारत में 9.2 लाख पेशेवर सक्रिय

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 17, 2026 19:23 IST

मुंबई: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी नौकरियों का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अब कंपनियां केवल नई तकनीकों के परीक्षण और प्रयोग तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि AI को अपने दैनिक कारोबार, प्रशासन और निर्णय प्रक्रिया में लागू करने के लिए विशेषज्ञों की तलाश कर रही हैं। एक नई रिपोर्ट में यह रुझान स्पष्ट रूप से सामने आया है।

रिपोर्ट में सामने आई AI कार्यबल की तस्वीर

स्टाफिंग और वर्कफोर्स सॉल्यूशंस कंपनी क्वेस कॉर्प की ‘इंडिया AI वर्कफोर्स एनालिसिस 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्तमान में लगभग 9.20 लाख AI पेशेवर कार्यरत हैं। इनमें 2.57 लाख लोग कोर AI भूमिकाओं में हैं, जबकि 6.63 लाख कर्मचारी AI-एम्बेडेड या AI-संबद्ध भूमिकाओं में काम कर रहे हैं। करीब 3.5 लाख नौकरी विज्ञापनों और अन्य उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट बताती है कि AI प्रतिभाओं की भर्ती अब प्रयोगात्मक चरण से निकलकर कार्यान्वयन और विस्तार के चरण में पहुंच चुकी है।

किस तरह के विशेषज्ञों की तलाश कर रही हैं कंपनियां

रिपोर्ट के मुताबिक नियोक्ता अब ऐसे पेशेवरों को नियुक्त करना चाहते हैं जो AI समाधानों को लागू करने, उनका प्रबंधन करने, विभिन्न प्रणालियों से जोड़ने और उन्हें बड़े पैमाने पर संचालित करने की क्षमता रखते हों।

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) पुनः उपयोग योग्य आंतरिक AI प्लेटफॉर्म, एंटरप्राइज इंटीग्रेशन और AI गवर्नेंस से जुड़े विशेषज्ञों की भर्ती कर रहे हैं। वहीं सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियां अपने ग्राहकों की परियोजनाओं में बड़े स्तर पर AI लागू करने के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति कर रही हैं। दूसरी ओर विभिन्न उद्योगों से जुड़ी कंपनियां वित्त, जोखिम प्रबंधन, परिचालन, ग्राहक अनुभव और कर्मचारी प्रबंधन प्रणालियों में AI को जोड़ने के लिए चुनिंदा नियुक्तियां कर रही हैं।

मांग और उपलब्ध प्रतिभा में दिखा असंतुलन

रिपोर्ट के अनुसार 3.5 लाख सक्रिय नौकरी विज्ञापनों में से लगभग 66 से 68 प्रतिशत मांग कोर AI भूमिकाओं के लिए है, जबकि 32 से 34 प्रतिशत मांग AI-एम्बेडेड भूमिकाओं की है। हालांकि उपलब्ध कार्यबल का वितरण इसके उलट है। कुल 9.20 लाख AI पेशेवरों में 72 से 74 प्रतिशत लोग AI-एम्बेडेड भूमिकाओं में कार्यरत हैं, जबकि केवल 26 से 28 प्रतिशत कर्मचारी कोर AI पदों पर हैं। इससे स्पष्ट होता है कि कंपनियों की मौजूदा जरूरत और उपलब्ध प्रतिभा के बीच अंतर बना हुआ है।

AI विकास के तीन प्रमुख केंद्र

क्वेस आईटी स्टाफिंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कपिल जोशी ने कहा कि अध्ययन में AI विकास के तीन प्रमुख स्रोत उभरकर सामने आए हैं। उनके अनुसार, जीसीसी पुनः उपयोग योग्य AI प्लेटफॉर्म और गवर्नेंस क्षमताओं का निर्माण कर रहे हैं, आईटी सेवा कंपनियां बड़े पैमाने पर AI तैनाती को औद्योगिक स्वरूप दे रही हैं और विभिन्न उद्यम सीधे अपने कारोबारी कार्यप्रवाह तथा निर्णय प्रक्रिया में AI को शामिल कर रहे हैं। इन बदलावों ने प्रतिभाओं के लिए एक नया परिदृश्य तैयार किया है, जहां प्रयोग करने की क्षमता की तुलना में कार्यान्वयन की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

कारोबारी विभागों में बढ़ रहा AI का उपयोग

कपिल जोशी के अनुसार भारत के कुल AI कार्यबल का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अब पारंपरिक AI विशेषज्ञ भूमिकाओं के बाहर कार्य कर रहा है। साथ ही AI से जुड़ी कुल मांग का लगभग एक-तिहाई हिस्सा परिचालन, ग्राहक सेवा, विपणन, वित्त, प्रशासन और कार्यबल प्रबंधन जैसे कारोबारी विभागों से आ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्राहक परिचालन से जुड़े 45 से 60 प्रतिशत कार्यप्रवाहों में AI की भूमिका बढ़ सकती है। वहीं विपणन क्षेत्र उन क्षेत्रों में शामिल है जहां AI की मदद से सबसे तेज बदलाव देखने को मिल रहा है और कंपनियां बड़े पैमाने पर इस तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

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