एवियन (फ्रांस): फ्रांस में आयोजित 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कानून आधारित व्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए इसे स्वतंत्र और खुला इंडो-पैसिफिक बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नेताओं ने पूर्वी चीन सागर, दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रमों से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की।
भूराजनीतिक मुद्दों पर जारी संयुक्त घोषणा में जी-7 नेताओं ने कहा कि वे कानून के शासन पर आधारित स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्वी चीन सागर, दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य में यथास्थिति को बल प्रयोग या दबाव के माध्यम से बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास का वे विरोध करते हैं। नेताओं ने कहा कि इन मुद्दों का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से किया जाना चाहिए। उत्तर कोरिया को लेकर भी जी-7 देशों ने गंभीर चिंता व्यक्त की। संयुक्त बयान में कहा गया कि उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
घोषणा में उत्तर कोरिया से लंबे समय से लंबित अपहरण से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान करने का भी आग्रह किया गया। साथ ही नेताओं ने कहा कि उत्तर कोरिया से जुड़े क्रिप्टोकरेंसी चोरी और साइबर अपराध जैसी गतिविधियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। जी-7 नेताओं ने 11 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेजबानी में आयोजित ‘ग्लोबल कन्वर्जेंस फॉर ग्रोथ समिट’ का भी स्वागत किया, जिसमें चीन ने भाग लिया था। नेताओं ने जी-20 और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों के माध्यम से वैश्विक आर्थिक असंतुलन की समस्याओं के समाधान के लिए प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
यूक्रेन संघर्ष को लेकर जी-7 देशों ने यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन में एकजुट रहने का संकल्प व्यक्त किया। संयुक्त घोषणा में कहा गया कि जी-7 देश यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़े हैं और उसकी सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए सहयोग जारी रखेंगे। नेताओं ने यूक्रेन को अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां, इंटरसेप्टर और लंबी दूरी की सैन्य क्षमताएं उपलब्ध कराने की योजना की घोषणा की। इसके अलावा लाइसेंसिंग व्यवस्था के माध्यम से यूक्रेन के घरेलू सैन्य उत्पादन को बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार करने की बात कही गई।
जी-7 देशों ने आगामी सर्दियों के मौसम से पहले यूक्रेन की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सहायता देने का भी वादा किया। साथ ही रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए तेल और गैस क्षेत्र को लक्षित करने वाले कड़े प्रतिबंधों सहित अन्य उपायों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन संघर्ष को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि यदि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की गंभीर और जिम्मेदार बातचीत के लिए तैयार हों तो वे वार्ता के लिए मॉस्को की यात्रा कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल मॉस्को और कीव के बीच कोई आधिकारिक संवाद तंत्र सक्रिय नहीं है।
दूसरी ओर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित जी-7-यूक्रेन सत्र के नतीजों का स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि बैठक में यूक्रेन के लिए अधिक वायु रक्षा मिसाइलों की आपूर्ति, सर्दियों के लिए सहायता पैकेज और रूस पर दबाव बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।