एवियनः अमेरिका और ईरान के बीच हुए बहुचर्चित समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिनों में इस समझौते का पूरा दस्तावेज सार्वजनिक कर दिया जाएगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह स्वयं प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दस्तावेज को शब्द-दर-शब्द पढ़ सकते हैं, ताकि समझौते की शर्तों को लेकर किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने।
फ्रांस में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ मुलाकात के समय ट्रंप ने यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि समझौता बेहद महत्वपूर्ण है और जनता को इसकी वास्तविक जानकारी मिलनी चाहिए।
'पहले औपचारिक मंच, फिर होगा खुलासा'
ट्रंप ने कहा कि वह समझौते को सार्वजनिक करने से पहले एक औपचारिक मंच तय करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि दस्तावेज को सार्वजनिक करने में उन्हें कोई समस्या नहीं है।
उन्होंने समझौते की मूल भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। ट्रंप ने इस समझौते को अमेरिका की सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के लिए अहम बताया।
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रविवार को हुए हस्ताक्षर, लेकिन दस्तावेज अभी तक गोपनीय
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि समझौते पर रविवार को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। इसके बावजूद समझौते का पूरा पाठ अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
स्थिति यह है कि अमेरिकी कांग्रेस के अधिकांश सदस्य और कई मित्र देशों के नेता भी अभी तक इस दस्तावेज को पूरी तरह नहीं देख पाए हैं। इसके बावजूद ट्रंप ने कहा कि वह समझौते को गोपनीय बनाए रखने के पक्ष में नहीं हैं और जल्द ही इसे सार्वजनिक मंच पर रखा जाएगा।
मीडिया के सामने पढ़ सकते हैं पूरा समझौता
ट्रंप ने कहा कि वह चाहते हैं कि मीडिया समझौते की सही रिपोर्टिंग करे। इसी कारण वह स्वयं प्रेस कॉन्फ्रेंस में दस्तावेज की सभी धाराओं को विस्तार से प्रस्तुत करने पर विचार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह पूरे समझौते को कैमरों के सामने पढ़कर सुनाएंगे, जिससे लोगों को किसी तीसरे पक्ष की व्याख्या पर निर्भर न रहना पड़े।
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कांग्रेस को भी भेजा जाएगा दस्तावेज
एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा में ट्रंप ने कहा कि समझौते को अमेरिकी कांग्रेस के पास समीक्षा के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में यह विचार उनके मन में नहीं था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि कांग्रेस को दस्तावेज उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि यह सुझाव उन्हें पसंद आया है और वह इसे अमल में लाने के लिए तैयार हैं।
कांग्रेस की भूमिका पर पहले से चल रही थी बहस
ईरान समझौते की जानकारी सामने आने के बाद कई अमेरिकी सांसदों ने इसकी संसदीय समीक्षा की मांग की थी। दक्षिण कैरोलिना से रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा था कि अमेरिका के कानून के अनुसार ईरान से जुड़ा कोई भी परमाणु समझौता कांग्रेस के समक्ष समीक्षा और मतदान के लिए रखा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी आग्रह किया था कि समझौते को तैयार करने वाली वार्ता टीम कांग्रेस को इसके प्रमुख प्रावधानों और रणनीतिक महत्व की जानकारी दे।
राजनीतिक कटाक्ष से भी चर्चा में रहे ट्रंप
बातचीत के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी राजनीति पर भी व्यंग्य किया। उन्होंने हंसते हुए कहा कि यदि वह कांग्रेस से इस समझौते को मंजूरी न देने की अपील करें, तो संभव है कि उनके राजनीतिक विरोधी उल्टा उसका समर्थन कर दें।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते को हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। ऐसे में दुनिया भर के देशों, रणनीतिक विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की नजर इसके आधिकारिक पाठ पर टिकी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों देशों ने परमाणु कार्यक्रम, सुरक्षा गारंटी, क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य के संबंधों को लेकर किन शर्तों पर सहमति बनाई है। फिलहाल ट्रंप के वादे के बाद दुनिया समझौते के आधिकारिक खुलासे का इंतजार कर रही है।