जयपुर : राजस्थान के जयपुर में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को आरोप लगाया कि नीट (यूजी) 2026 परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों ने जनता का विश्वास पूरी तरह हिला दिया है।
मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए अभियान को देश के युवाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है, क्योंकि युवाओं की समस्याओं को लेकर कोई न कोई आवाज उठा रहा है।
उन्होंने कहा राहुल जी ने जो कार्यक्रम शुरू किया है, उसे सभी युवाओं का समर्थन मिल रहा है क्योंकि आखिरकार कोई उनकी आवाज उठा रहा है। इसी कारण उन्होंने इसकी शुरुआत कोटा से की जो आईआईटी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रमुख केंद्र बन चुका है। कल भी एक और छात्र की आत्महत्या की खबर सामने आई।
मेरा मानना है कि यह दूसरी या तीसरी घटना है। पूरे देश में कितनी आत्महत्याएं हुई होंगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है। स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है।
अशोक गहलोत ने आगे आरोप लगाया कि विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तोड़ दिया है।
उन्होंने कहा जिस तरह एक के बाद एक पेपर लीक की घटनाएं सामने आई है चाहे वह कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की परीक्षा हो या नीट उससे जनता का विश्वास पूरी तरह टूट गया है। यह देश के लिए बहुत बड़ा मुद्दा बन चुका है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लगातार उठने के बावजूद केंद्र सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।
उन्होंने कहा इस मुद्दे पर संदेश देने के लिए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई थी, लेकिन सरकार ऐसा कराने में असफल रही। लोकतंत्र का मूल सिद्धांत यह है कि जब जनता की ओर से कोई बड़ी मांग उठती है तो उस पर कुछ न कुछ कार्रवाई की जाती है। लेकिन सरकार ऐसा भी नहीं कर रही है। यह देश का दुर्भाग्य है।
अशोक गहलोत ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार और विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्यशैली और उसके निर्णयों को लेकर जनता में असंतोष बढ़ रहा है और यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। इसके बाद अधिकारियों ने घोषणा की कि परीक्षा दोबारा 21 जून को आयोजित की जाएगी।
इस बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने भारत में टेलीग्राम प्लेटफॉर्म की पहुंच को सीमित अवधि के लिए प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। यह प्रतिबंध 22 जून तक प्रभावी रहेगा और इसमें नीट (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा का दिन तथा उसके बाद की अवधि भी शामिल है।
अधिकारियों के अनुसार यह कदम उस तकनीकी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है जिसके माध्यम से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के संबंध में परीक्षा समाप्त होने के बाद कथित रूप से ‘पेपर लीक’ के फर्जी साक्ष्य तैयार कर प्रसारित किए जाते रहे हैं।
पुनर्परीक्षा की तैयारियों के बीच परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, छात्रों के हितों की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना अब संबंधित एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।