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गुजरात में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 84 बच्चों को कराया गया मुक्त

सूरत की टेक्सटाइल यूनिट समेत कई उद्योगों में बच्चों से काम कराने का खुलासा

By प्रियंका महतो

Jun 16, 2026 13:19 IST

गांधीनग : गुजरात पुलिस ने बाल श्रम के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 84 बच्चों को शोषणकारी कार्य परिस्थितियों से मुक्त कराया है। इसके साथ ही अभियान के पहले 14 दिनों में 26 आरोपियों के खिलाफ 16 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। यह कार्रवाई राज्यव्यापी एक माह के अभियान ‘ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम’ के अंतर्गत की गई है।

जानकारी के अनुसार गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में यह अभियान शुरू किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि “हर बच्चा स्कूल में हो, कोई भी बच्चा काम पर न हो।”

इस अभियान के तहत औद्योगिक क्षेत्रों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और असंगठित श्रम इकाइयों में व्यापक जांच अभियान चलाया जा रहा है जहां श्रम कानूनों का उल्लंघन करते हुए बच्चों से काम कराया जा रहा था।

इसी क्रम में सूरत शहर की कामरेज पुलिस ने एक सूचना के आधार पर ‘जय अंबे टेक्सटाइल्स’ नामक कपड़ा इकाई पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान दो नाबालिग लड़कों को वहां से मुक्त कराया गया, जिन्हें कथित तौर पर शोषणकारी परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इन बच्चों को प्रतिदिन केवल 200 रुपये का भुगतान किया जा रहा था जो कानूनी और नैतिक श्रम मानकों से काफी कम है। पुलिस को यह भी पता चला कि जब बच्चों ने काम जारी रखने से इनकार किया, तब उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध दोबारा काम पर लगाया गया।

अधिकारियों के अनुसार बच्चों से सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक काम कराया जाता था। उन्हें केवल एक घंटे का भोजन अवकाश दिया जाता था। इस दौरान उन्हें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ता था।

बचाए गए बच्चों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। वहीं संबंधित नियोक्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम तथा किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

पुलिस महानिदेशक जी. एस. मलिक ने कहा कि यह अभियान केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बचाए गए बच्चों के पुनर्वास और उनके दीर्घकालिक पुनर्निर्माण को भी सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम’ के पहले 14 दिनों में 84 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया है, 16 मामले दर्ज किए गए हैं और 26 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इसके अलावा 67 बच्चों का पुनर्वास किया जा चुका है तथा राज्यभर में 160 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

जी. एस. मलिक ने कहा कि यह अभियान तत्काल राहत के साथ-साथ बाल शोषण की जड़ों को समाप्त करने की दिशा में भी काम कर रहा है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआईडी अपराध, महिला प्रकोष्ठ) अजय चौधरी ने बताया कि बाल श्रम के अधिकांश मामले कपड़ा इकाइयों, होटलों, चावल मिलों और विभिन्न लघु औद्योगिक प्रतिष्ठानों से सामने आए हैं।

उन्होंने कहा कि जांच से यह भी संकेत मिला है कि बचाए गए कई बच्चे बिहार और राजस्थान से आए प्रवासी परिवारों से संबंधित हैं। इससे श्रमिक आपूर्ति नेटवर्कों के जरिए अंतरराज्यीय आवाजाही और संभावित मानव तस्करी की आशंकाओं की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि अब अभियान का फोकस केवल व्यक्तिगत नियोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन ठेकेदारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी चिन्हित कर ध्वस्त किया जाएगा जो बाल श्रमिकों की व्यवस्था करते हैं।

एक अधिकारी ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल बच्चों को मुक्त कराना नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है। बाल श्रम में शामिल नियोक्ताओं, ठेकेदारों और मध्यस्थों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

मामलों के प्रारंभिक विश्लेषण में गरीबी, पलायन, स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति और सस्ते श्रम की मांग को बाल श्रम के प्रमुख कारणों के रूप में चिन्हित किया गया है।

इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए अब खुफिया सूचनाओं के आधार पर निरीक्षण, अचानक छापेमारी और श्रम विभाग, बाल कल्याण समितियों, गैर-सरकारी संगठनों तथा शैक्षणिक संस्थानों के साथ समन्वय को और मजबूत किया जा रहा है।

अजय चौधरी ने बताया कि अभियान को चार चरणों में संरचित किया गया है। पहले चरण में बाल श्रम के संभावित केंद्रों की पहचान और स्कूल छोड़ चुके बच्चों का पता लगाया जाता है। इसके बाद निरीक्षण और बचाव अभियान चलाया जाता है। तीसरे चरण में बचाए गए बच्चों का पुनर्वास कर उन्हें विद्यालयों में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। अंतिम चरण में बाल श्रम से जुड़े अपराधियों और नेटवर्कों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार अभियान के आगामी चरणों में बार-बार अपराध करने वाले नेटवर्कों को समाप्त करने और बचाए गए बच्चों के दीर्घकालिक पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इस पहल के तहत गुजरात पुलिस ने पूरे अभियान के दौरान 50,000 से अधिक स्थानों का निरीक्षण करने, 10,000 खुफिया सूचनाएं एकत्र करने और 5,000 से अधिक बाल श्रमिकों को मुक्त कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इसके साथ ही प्रशासन ने नियोक्ताओं, व्यापारियों और फैक्टरी मालिकों के बीच भी जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। उन्हें बाल श्रम कानूनों तथा शिक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। अभियान का मुख्य संदेश है कि किसी भी बच्चे को श्रम के कारण शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए।

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