अटलांटा : सिर्फ 90 मिनट का मुकाबला केप वर्डे के 40 वर्षीय गोलकीपर वोजिन्हा की जिंदगी बदलने के लिए काफी साबित हुआ। मैदान पर शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ मैदान के बाहर भी वह रातोंरात स्टार बन गए। जो खिलाड़ी पहले सीमित पहचान रखता था, वही अब विश्व कप का चर्चित चेहरा बन चुका है।
सोशल मीडिया के दौर में लाखों फॉलोअर हासिल करने में आम तौर पर महीनों या वर्षों का समय लग जाता है। लेकिन वोजिन्हा के मामले में यह सफर महज 90 मिनट में पूरा हो गया। स्पेन जैसी मजबूत टीम को रोकने के बाद उन्होंने न केवल चल रहे विश्व कप में सुर्खियां बटोरीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त लोकप्रियता हासिल कर ली।
वोजिन्हा को अपने देश की जर्सी में विश्व कप खेलने के लिए 40 वर्ष की उम्र तक इंतजार करना पड़ा। इतने लंबे इंतजार का फल आखिरकार उन्हें मिल गया। केप वर्डे के इस अनुभवी गोलकीपर ने अपने पहले ही विश्व कप मैच में पूर्व विश्व चैंपियन स्पेन को रोककर टूर्नामेंट के सबसे बड़े नायकों में जगह बना ली।
स्पेन के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने कुल 8 शानदार बचाव किए। पूरी टीम ने 23 शॉट लगाए, लेकिन वोजिन्हा ने एक के बाद एक हमलों को नाकाम कर दिया। लामिन यामाल, मिकेल ओयारजाबाल, फैबियन रुइज, गावी और पेड्री जैसे स्टार खिलाड़ियों के प्रयास भी उनके सामने बेअसर साबित हुए। मैदान पर वह स्पेन के आक्रमणों को रोक रहे थे, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसकों की संख्या तूफानी रफ्तार से बढ़ रही थी।
स्पेन के खिलाफ मैच शुरू होने से पहले इंस्टाग्राम पर उनके केवल 45 हजार फॉलोअर थे। मुकाबला समाप्त होने के बाद जब वह प्रसारणकर्ता को साक्षात्कार दे रहे थे, तब तक उनके फॉलोअर 15 लाख तक पहुंच चुके थे। इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक यह संख्या बढ़कर 53 लाख यानी 5.3 मिलियन हो गई।
वोजिन्हा ने पेशेवर फुटबॉल करियर की शुरुआत 25 वर्ष की उम्र में की थी। उन्होंने मोल्दोवा, साइप्रस, स्लोवाकिया और पुर्तगाल जैसे देशों में क्लब फुटबॉल खेला, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें कभी बड़ी पहचान नहीं मिली। वह किसी बड़े या प्रतिष्ठित क्लब का हिस्सा भी नहीं बन सके। इसके बावजूद उनके मन में एक सपना हमेशा जीवित रहा-विश्व कप में खेलने का सपना।
केप वर्डे जैसे छोटे देश के लिए विश्व कप तक पहुंचना कितना कठिन है, इसका उन्हें पूरा अंदाजा था। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि बढ़ती उम्र के कारण उन्होंने संन्यास लेने के बारे में भी सोचा था। हालांकि अपने सपने को पूरा करने की चाह में उन्होंने खेलना जारी रखा।
वोजिन्हा ने कहा- “मैंने पूरी जिंदगी इस पल का इंतजार किया है। इस सपने को साकार करने के लिए लगातार मेहनत की है। अतीत में बहुत से लोगों ने यह सपना देखा, लेकिन वे इसे हकीकत में नहीं बदल पाए।”
दुनिया उन्हें वोजिन्हा के नाम से जानती है, लेकिन यह उनका वास्तविक नाम नहीं बल्कि उपनाम है। उनका असली नाम होसिमार जोजे इवोरा डायस है। पुर्तगाली भाषा में ‘वोजिन्हा’ शब्द का अर्थ ‘दादी’ होता है।
फुटबॉल के शुरुआती दिनों में उनके साथी खिलाड़ी उन्हें चिढ़ाने के लिए इसी नाम से बुलाते थे। उस समय वह रोते हुए अपनी दादी के पास चले जाया करते थे। बाद में जब उन्होंने पेशेवर फुटबॉल खेलना शुरू किया, तो उन्होंने इसी उपनाम को अपनी पहचान बना लिया और इसे ही अपने नाम के रूप में अपनाया। आज यही नाम उन्हें विश्व फुटबॉल में नई पहचान दिला रहा है।