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TMC के बागी सांसदों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने की सुगबुगाहट के बीच कानूनी दांव-पेंच की चल रही तैयारी

राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हो रही हैं कि इन 20 सांसदों में सबसे वरिष्ठ सुदीप बंद्योपाध्याय और एक्टर-सांसद दीपक अधिकारी (देव) को केंद्र सरकार की Y श्रेणी सुरक्षा दी जा सकती है।

By Moumita Bhattacharya

Jun 16, 2026 10:46 IST

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने पार्टी बदलकर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय का फैसला लिया है। अब उन्हें एक नई पार्टी के सांसद के तौर पर जाना जाएगा। संसद में उनके बैठने के लिए अलग कमरा भी मिलेगा और जल्द ही पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में पार्टी ऑफिस खोलने की योजना भी बनायी गयी है।

फिलहाल अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में रहने की योजना से पीछे हटने की बात सामने आई है लेकिन भविष्य में इसे लेकर कानूनी दांवपेंच की संभावना भी मजबूत होती दिख रही है। इस बीच इन 20 सांसदों को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अटकलों का बाजार तेजी से गर्म हो रहा है।

क्या भाजपा इन 20 सांसदों को लेकर क्या कोई अलग रणनीति बनाने वाली है? क्या रातोंरात तृणमूल से NCPI में विलय हुए इन 20 सांसदों की भाजपा से कोई मांग है? राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हो रही हैं कि इन 20 सांसदों में सबसे वरिष्ठ सुदीप बंद्योपाध्याय और एक्टर-सांसद दीपक अधिकारी (देव) को केंद्र सरकार की Y श्रेणी सुरक्षा दी जा सकती है।

यह बिल्कुल उसी तर्ज पर किया जाएगा जैसा तृणमूल में रहते हुए जब काकोली घोष दस्तीदार द्वारा विद्रोह के संकेत देने पर सुरक्षा मुहैया करवायी गयी है।

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साथ ही चर्चा यह भी है कि NCPI के सांसदों में से एक या एक से अधिक को नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में मंत्री या राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया जा सकता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। रविवार (14 जून) रात से पहले तक NCPI का कोई भी संसदीय या विधायी प्रतिनिधि नहीं था।

लेकिन तृणमूल के 20 बागी सांसदों के इस पार्टी में शामिल होने के बाद यह पार्टी अब एनडीए सरकार के सहयोगी पार्टियों में लोकसभा में भाजपा के बाद सबसे अधिक सांसदों वाली पार्टी बन गई है।

NDA की सहयोगी पार्टियों में किसके पास कितने सांसद?

लोकसभा में वर्तमान में NDA की सहयोगी पार्टियों के पास सांसदों का ब्यौरा कुछ इस प्रकार है -

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) - 240 सांसद

तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) - 16 सांसद

जनता दल (यूनाइटेड) यानी जेडीयू - 12 सांसद

और अब एनसीपीआई - 20 सांसद (यह अब NDA की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन गई है।)

इसी वजह से दिल्ली में इस बात को लेकर अटकलें तेज हो गईं कि क्या NCPI के सांसदों में से किसी को कैबिनेट मंत्री या स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री तथा किसी को राज्य मंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे का समाधान इतनी आसानी से होना मुश्किल है।

अभी तक भाजपा के केंद्रीय और पश्चिम बंगाल के साथ-साथ NDA के अन्य घटक दलों का रुख अभी तक स्पष्ट नहीं है। संसदीय सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि NCPI में विलय के बाद सुदीप बंद्योपाध्याय ने काकोली घोष दस्तीदार सहित सभी 20 सांसदों को लेकर 'डेवलपमेंट ऑफ बंगाल' नाम से एक अलग व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया है।

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दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल पर कानूनी अधिकारों और चुनाव चिन्ह को लेकर खींचतान तथा कानूनी विवाद बहुत जल्द शुरू हो सकता है।

सूत्रों की मानें तो भाजपा के करीबी माने जाने वाले दिल्ली निवासी दो वरिष्ठ वकील इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है। माना जा रहा है कि जुलाई के दूसरे सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट में जब पूर्ण रूप से कामकाज शुरू हो जाएगा तब असली कानूनी टकराव भी शुरू हो सकता है।

इस विषय पर वरिष्ठ संवैधानिक विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 122 के अनुसार लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच माने जाने वाले संसद की कार्यवाही को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। यह एक विशेष संवैधानिक सुरक्षा कवच है। भविष्य में तृणमूल के बागी सांसदों को भी इस सुरक्षा का लाभ मिल सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी स्थिति में ये सांसद संसद के सत्र के दौरान प्रस्तुत किसी भी विधेयक (बिल) पर केंद्र सरकार तथा NDA का समर्थन करने में सक्षम होंगे और उनके संसदीय कदमों को अदालत में चुनौती देना आसान नहीं होगा।

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