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कालीघाट में टीएमसी नेता कुणाल घोष पर अंडे से हमला, ममता बनर्जी के आवास के बाहर हुई घटना

बैठक से निकलते ही निशाना बने कुणाल घोष, सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल।

By श्वेता सिंह

Jun 15, 2026 21:06 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नया ट्रेंड चर्चा का विषय बना हुआ है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं पर लगातार अंडे फेंकने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और बेलेघाटा विधायक कुणाल घोष भी निशाने पर आ गए हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह घटना ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास के ठीक बाहर हुई।

रविवार दोपहर करीब एक बजे कुणाल घोष ममता बनर्जी के घर पर हुई बैठक से बाहर निकल रहे थे। तभी एक युवक ने उनकी ओर अंडा दे मारा। कुणाल घोष ने खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन अंडा उनके सिर पर फट गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति अंडा फेंकता दिखाई देता है, जबकि दूसरा पूरी घटना रिकॉर्ड करता नजर आता है।

सुरक्षा घेरे में कैसे हुई ऐसी घटना?

कालीघाट राज्य के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सुरक्षा व्यवस्था के बीच हमलावर वहां तक कैसे पहुंचा और घटना को अंजाम देने के बाद आसानी से निकल कैसे गया।

राजनीतिक हलकों में इसे सुरक्षा चूक के तौर पर देखा जा रहा है। इसे सुरक्षा व्यवस्था की विफलता बताया जा रहा है। टीएमसी इसे सुनियोजित साजिश करार दे रही है।

हमलावर ने खुद बताई वजह

अंडा फेंकने वाले युवक की पहचान चंदन के रूप में हुई है। उसने मीडिया के सामने आकर कहा कि कुणाल घोष को अंडा मारना जनता की नाराजगी का प्रतीक है। उसने आरोप लगाया कि नेता ने कई गलत काम किए हैं, हालांकि वह अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस उदाहरण पेश नहीं कर सका।

कुणाल घोष ने पुलिस पर उठाए सवाल

घटना के बाद कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर हमला और सुनियोजित गुंडागर्दी बताया। उनका आरोप है कि पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन हमलावरों को पकड़ने के बजाय निकल जाने दिया गया।

उन्होंने कहा कि यदि ममता बनर्जी के आवास के सामने ऐसी घटना हो सकती है, तो आम लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

टीएमसी नेताओं के खिलाफ बढ़ रहा विरोध?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का संकेत भी हो सकती है। हाल के महीनों में टीएमसी के कई नेताओं को विरोध का सामना करना पड़ा है।

अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी से जुड़ी घटनाएं भी सुर्खियों में रही थीं। अब कुणाल घोष पर अंडा फेंके जाने के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या अंडे से हमला करना बंगाल की राजनीति में विरोध जताने का नया तरीका बनता जा रहा है।

चुनावी झटके के बाद बढ़ी चुनौती

2026 विधानसभा चुनाव में टीएमसी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। चुनाव के बाद कई नेताओं के भाजपा-एनडीए खेमे की ओर जाने से पार्टी दबाव में रही है। ऐसे समय में कुणाल घोष जैसे नेता लगातार पार्टी का पक्ष रखते रहे हैं और पार्टी छोड़ने वालों पर खुलकर हमला बोलते रहे हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि इस कारण वे समर्थकों और विरोधियों दोनों के बीच चर्चा के केंद्र में रहते हैं।

सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज

घटना के बाद टीएमसी नेताओं ने इसे भाजपा की साजिश बताया है। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व को बदनाम करने के लिए ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है।

दूसरी ओर भाजपा का दावा है कि यह जनता के भीतर बढ़ रही नाराजगी की अभिव्यक्ति है। हालांकि किसी भी पक्ष के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जांच जारी, जवाब का इंतजार

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। कालीघाट जैसी हाई-प्रोफाइल जगह पर हुई इस घटना ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह एक अलग-थलग विरोध की घटना है या फिर टीएमसी नेताओं के खिलाफ बढ़ते असंतोष का संकेत। आने वाले दिनों में जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस सवाल का जवाब तय कर सकती हैं।

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