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El Nino 2026: रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ेगा महासागरों का तापमान, मत्स्य उद्योग पर मंडराया संकट

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बढ़ती समुद्री गर्मी से मछलियों की संख्या घट सकती है। वैज्ञानिकों ने तैयारी की सलाह दी है।

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 15, 2026 17:09 IST

वॉशिंगटन: जलवायु विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि एल नीनो (El Nino) की वापसी हो चुकी है। पूर्वानुमानों के अनुसार 2026 के अंत तक दुनिया को एक मजबूत या अत्यंत मजबूत एल नीनो का सामना करना पड़ सकता है, जिसका असर मौसम, जलवायु और समुद्री तापमान पर व्यापक रूप से दिखाई देगा।

एल नीनो, प्रशांत महासागर आधारित जलवायु चक्र (ENSO) प्रणाली का प्रमुख चरण है। इसके दौरान इक्वाडोर के तट से पश्चिम दिशा में लगभग 10,000 किलोमीटर तक फैले प्रशांत महासागर का बड़ा हिस्सा कई महीनों तक सामान्य से 1 से 2 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म हो जाता है। तापमान में यह मामूली दिखने वाली वृद्धि वैश्विक स्तर पर हवाओं, वर्षा और तापमान के पैटर्न को प्रभावित करने के लिए पर्याप्त होती है। समुद्री और जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि गर्मियों और शरद ऋतु के दौरान एल नीनो के और मजबूत होने से समुद्र का तापमान और बढ़ेगा, जिसके गंभीर पारिस्थितिक प्रभाव सामने आ सकते हैं।

एल नीनो का वैश्विक प्रभाव

हर एल नीनो घटना अलग होती है, लेकिन पिछले अनुभवों के आधार पर वैज्ञानिक इसके संभावित प्रभावों का अनुमान लगा सकते हैं। आमतौर पर यह कुछ क्षेत्रों में वर्षा बढ़ाता है, जबकि कुछ इलाकों को सूखे की ओर धकेल देता है। दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्सों में यह तूफानों की गतिविधि बढ़ा सकता है, जबकि अटलांटिक क्षेत्र में चक्रवातों की संख्या कम हो सकती है।

हालांकि इसका प्रभाव केवल जमीन तक सीमित नहीं रहता। एल नीनो समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों पर भी गहरा असर डालता है, जिन पर दुनिया का बड़ा मत्स्य उद्योग निर्भर है। इसमें प्रवाल भित्तियां (कोरल रीफ), समुद्री घास के मैदान और विभिन्न मछली प्रजातियां शामिल हैं।

क्या होती है मरीन हीट वेव?

एल नीनो अक्सर समुद्र में अत्यधिक गर्मी की लंबी अवधि पैदा करता है, जिसे मरीन हीट वेव कहा जाता है। यह उसी तरह की स्थिति है जैसी जमीन पर लू या हीट वेव के दौरान देखी जाती है।

कभी-कभी यह प्रभाव कुछ दिनों या हफ्तों तक सीमित रहता है, लेकिन बड़े पैमाने पर मरीन हीट वेव महीनों या वर्षों तक जारी रह सकती है। 2013-14 में उत्तर-पूर्वी प्रशांत महासागर में बनी वॉर्म ब्लॉब घटना इसका प्रमुख उदाहरण थी, जहां टेक्सास से लगभग तीन गुना बड़े क्षेत्र में समुद्र का तापमान सामान्य से 2 से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक बना रहा।

समुद्री जीवों के लिए बढ़ता खतरा

समुद्री जीव अक्सर एक निश्चित तापमान के अनुरूप विकसित होते हैं। ऐसे में तापमान बढ़ने पर उनके लिए जीवित रहना कठिन हो जाता है। गर्म पानी में कुछ मछलियों का चयापचय (मेटाबॉलिज्म) इतना बढ़ जाता है कि वे जितनी ऊर्जा प्राप्त करती हैं, उससे अधिक खर्च करने लगती हैं। इसके परिणामस्वरूप उनकी मृत्यु तक हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, अलास्का की खाड़ी में मरीन हीट वेव के बाद पैसिफिक कॉड मछलियों की संख्या में लगभग 70 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई थी।

इसके अलावा कोरल ब्लीचिंग, जहरीले शैवालों का प्रसार, समुद्री शैवालों का नष्ट होना और समुद्री स्तनधारियों के तट पर फंसने जैसी घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इन कारणों से हर वर्ष अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान होता है।

एल नीनो और समुद्री गर्मी का संबंध

एल नीनो के दौरान समुद्री गर्मी की घटनाओं की संभावना काफी बढ़ जाती है, हालांकि इसका प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकता है। अमेरिका के पश्चिमी तट पर सामान्यतः उत्तर से चलने वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे ठंडे और गहरे पानी का ऊपर आना कम हो जाता है। इसके कारण तटीय क्षेत्रों में समुद्र अधिक गर्म हो सकता है। कैलिफोर्निया के समुद्री क्षेत्र पहले से ही असामान्य रूप से गर्म हैं और एल नीनो इस स्थिति को और गंभीर बना सकता है। पेरू के मछुआरे सदियों से ऐसी परिस्थितियों का सामना करते रहे हैं, जब समुद्र का तापमान बढ़ने से मछलियां अपने पारंपरिक क्षेत्रों से दूर चली जाती हैं। वैज्ञानिकों ने 1920 के दशक में समझा कि यह घटना ENSO प्रणाली से जुड़ी हुई है।

भारत के पूर्व में स्थित बंगाल की खाड़ी में भी एल नीनो और वॉकर सर्कुलेशन नामक उष्णकटिबंधीय वायुमंडलीय प्रणाली के संयुक्त प्रभाव से मरीन हीट वेव का जोखिम बढ़ सकता है।

समुद्र की सतह के नीचे भी खतरा

वैज्ञानिकों के अनुसार केवल सतह पर दिखाई देने वाली गर्मी ही चिंता का विषय नहीं है। समुद्र तल के निकट भी बॉटम मरीन हीट वेव विकसित हो सकती है, जो कई बार सतही गर्मी से अधिक तीव्र और लंबी अवधि तक बनी रहती है। 1997-98 के दौरान अमेरिका के पश्चिमी तट पर समुद्र की सतह ठंडी होने के बाद भी समुद्र तल के पास गर्मी चार से पांच महीने तक बनी रही थी। ऐसी घटनाएं समुद्र की तलहटी में रहने वाली प्रजातियों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, 2018 में समुद्र तल तक पहुंची एक मरीन हीट वेव के बाद बेरिंग सागर में स्नो क्रैब की पकड़ में 84 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

2026 में क्या संकेत मिल रहे हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी बात यह है कि आधुनिक मौसमी मॉडल तीन से छह महीने पहले तक मरीन हीट वेव की भविष्यवाणी करने में सक्षम हैं और एल नीनो वर्षों में ये पूर्वानुमान अपेक्षाकृत अधिक सटीक साबित होते हैं। ताजा पूर्वानुमान बताते हैं कि जैसे-जैसे एल नीनो मजबूत होगा, वैसे-वैसे दुनिया के कई हिस्सों में मरीन हीट वेव विकसित हो सकती हैं। अनुमान है कि 2026 के अंत तक वैश्विक महासागरों का लगभग आधा हिस्सा हानिकारक समुद्री गर्मी की चपेट में आ सकता है।

विशेष रूप से कैलिफोर्निया और मेक्सिको के तटीय क्षेत्रों में गंभीर मरीन हीट वेव की आशंका जताई गई है। इसके अलावा हिंद महासागर और दक्षिणी महासागर के कुछ हिस्सों में भी असामान्य समुद्री गर्मी देखने को मिल सकती है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी समय रहते परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन उपलब्ध संकेत बताते हैं कि संभावित प्रभावों के लिए तैयारी शुरू कर देना समझदारी होगी।

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