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डील मंजूर पर भरोसा नहीं! ईरान ने अमेरिका के सामने रख दी शर्तों की लंबी सूची

उप विदेश मंत्री बोले- पहले खत्म हो संघर्ष, हटे नाकेबंदी और लौटें संपत्तियां, तभी आगे बढ़ेगी प्रक्रिया।

By श्वेता सिंह

Jun 15, 2026 07:30 IST

तेहरानः ईरान ने अमेरिका के साथ हुए शांति समझौते की पुष्टि कर दी है, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया कि अंतिम समझौते की दिशा में प्रस्तावित 60 दिन की वार्ता तभी शुरू होगी, जब वॉशिंगटन अपने वादों को व्यवहार में पूरा करता हुआ दिखाई देगा। ईरान ने युद्ध समाप्त करने, नाकेबंदी हटाने और उसकी संपत्तियां मुक्त करने जैसे मुद्दों को वार्ता की पूर्वशर्त बताया है।

ईरान के उप विदेश मंत्री (कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों) काजेम गरीबाबादी ने कहा कि समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर शुक्रवार को होंगे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तैयार हुए समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) का पूरा पाठ सार्वजनिक किया जाएगा।

गरीबाबादी ने कहा कि हालिया संघर्ष में ईरान ने अपने रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल किया और यह समझौता केवल कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि युद्धक्षेत्र में हासिल उपलब्धियों से भी जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, हस्ताक्षर के बाद दोनों प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख भविष्य की वार्ता प्रक्रिया और आगे की व्यवस्थाओं पर चर्चा करेंगे।

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उन्होंने दोहराया कि ईरान अगले चरण की बातचीत में तभी शामिल होगा, जब अमेरिका युद्ध समाप्त करने, नाकेबंदी हटाने और ईरानी परिसंपत्तियों की रिहाई से जुड़े अपने दायित्वों का पालन करता दिखाई देगा। गरीबाबादी ने यह भी कहा कि प्रस्तावित समझौता अमेरिका पर भरोसे का प्रतीक नहीं माना जाना चाहिए और तेहरान अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन पर लगातार नजर रखेगा।

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच शांति समझौता पूरा हो चुका है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की घोषणा करते हुए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सामान्य होने की बात कही।

उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि गहन वार्ताओं के बाद दोनों पक्ष सभी मोर्चों, विशेष रूप से लेबनान, में सैन्य अभियानों को स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमत हुए हैं।

शरीफ के अनुसार, समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे। उन्होंने कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की मध्यस्थता भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि हस्ताक्षर से पहले कई प्रारंभिक बैठकें आयोजित होंगी, जिनमें तकनीकी चर्चाओं और समझौते के क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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