अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान की युद्ध जैसी परिस्थिति के फिर से पैदा होने की वजह से ओमान उपसागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में सैंकड़ों भारतीय नाविक फंस गए हैं। अमेरिकी सेना द्वारा दागे गए रॉकेट की वजह से कम से कम 3 भारतीय नाविकों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है।
ऐसी भयावह परिस्थिति में बीच समुद्र से एक वीडियो संदेश भेजकर वहां फंसे भारतीय नाविकों और क्रु के सदस्यों ने भारत सरकार से जान बचाने की गुहार लगायी है। ऐसी आपातकालीन परिस्थिति में डिरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने भारतीय जहाज संस्थाओं और नाविकों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण निर्देशिका जारी की है।
क्या कहा गया है इस विज्ञप्ति में?
13 जून को डीजी शिपिंग की ओर से जारी की गयी इस विज्ञप्ति में वाणिज्यिक जहाजों को उक्त संघर्षपूर्ण इलाकों में सर्वाधित सतर्कता बनाए रखने के लिए कहा गया है। इस विज्ञप्ति में कहा गया है -
- अगले आदेश तक कोई भी शिपिंग कंपनी या नियुक्ति संस्था संघर्ष वाले इलाके में किसी भारतीय नाविक को न भेजे।
- MT Marivex, MT Settebello और MV Jalveer जैसे वाणिज्यिक जहाजों पर पिछले दिनों हुए हमले की घटना के मद्देनजर भारतीय नाविकों पर खतरा काफी बढ़ गया है।
- ऐसी परिस्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान महासागर से होकर आवाजाही के समय कैप्टन को सुरक्षा का सर्वाधिक ध्यान रखने की जरूरत है।
- आपातकालीन मदद के लिए नाविक सीधे 'Maritime Mutual Aid & Coordination Centre' (MMDAC) से ईमेल अथवा व्हाट्स ऐप के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।
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क्या भारतीय नाविकों को बनाया जा रहा है निशाना?
सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो में युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य या ओमान उपसागरिय इलाकों में फंसे नाविक आरोप लगा रहे हैं कि अमेरिकी सेना चुन-चुनकर सिर्फ ऐसे जहाजों को निशाना बना रही है जिसमें भारतीय सदस्य हैं।
वीडियो संदेश में एक भारतीय नाविक ने सवाल उठाते हुए कहा कि हम तो यहां काम करने आए हैं। क्यों हम पर हमला किया जा रहा है। हम सैनिक नहीं है, साधारण अनुबंधित कर्मचारी हैं। हमारी क्या गलती है?
500 से अधिक भारतीय नाविकों के फंसने की आशंका
फरवरी के अंत में जब से इस युद्ध की शुरुआत हुई है तब से लेकर अब तक यानी पिछले लगभग 3 महीनों से होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान उपसागर में 13 वाणिज्यिक जहाजों पर कम से कम 562 भारतीय नाविक फंसे हुए हैं।
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बताया जाता है कि इसमें से 329 लोग जलडमरूमध्य से पश्चिम और 233 नाविक ओमान उपसागरीय क्षेत्र में किसी प्रकार से अपना दिन काट रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान उपसागर का जलमार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहलाता है। यहां एक के बाद एक जहाजों पर अमेरिकी सेना हमला कर रही है और भारतीय नाविकों की मौत भविष्य के बड़े संकट का संकेत दे रही है।
भूराजनैतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों पर ऐसा हमला वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक होने के साथ-साथ आम कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़ा करता है। अब देखने वाली बात है कि वहां फंसे भारतीय नागरिकों को केंद्र सरकार की नई गाईडलाइन और आपातकालीन हेल्पलाइन कितनी राहत पहुंचाती है!