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G-7 मंच पर फ्रांस में आमने-सामने होंगे नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप, भारत-अमेरिका रिश्तों को मिल सकती है नई दिशा

व्हाइट हाउस ने बैठक की पुष्टि की। दोनों नेता आर्थिक सहयोग, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

By श्वेता सिंह

Jun 13, 2026 22:00 IST









वॉशिंगटन/नई दिल्ली। फ्रांस में आयोजित होने जा रहे जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अहम द्विपक्षीय मुलाकात होने जा रही है। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए संकेत दिया है कि बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता प्रमुख एजेंडा रहेगा। हालांकि दोनों देशों के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन जी-7 सम्मेलन के दौरान इसके अंतिम रूप लेने की संभावना कम बताई जा रही है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच पिछले एक वर्ष से व्यापार संबंधी गहन वार्ताएं चल रही हैं। इसी वर्ष दोनों देशों ने एक संयुक्त ढांचा समझौते (जॉइंट फ्रेमवर्क एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद बातचीत की प्रक्रिया और तेज हुई। कुछ सप्ताह पहले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत भी आया था और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की थी।

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच अब तक कोई व्यापक व्यापार समझौता नहीं हुआ है। दोनों देशों की आर्थिक संरचना और कारोबारी व्यवस्थाएं अलग-अलग हैं, जिसके कारण कई विषयों पर विस्तृत तकनीकी चर्चा की आवश्यकता है। अधिकारी ने यह भी बताया कि वह स्वयं अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगे ताकि लंबित मुद्दों पर आगे प्रगति की जा सके।

अमेरिकी पक्ष का मानना है कि जी-7 सम्मेलन में व्यापार समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच होने वाली बातचीत दोनों देशों को आगे की दिशा तय करने का अवसर देगी। इस दौरान वार्ता की वर्तमान स्थिति की समीक्षा होगी और यह भी तय किया जा सकता है कि समझौते को जल्द पूरा करने के लिए आगे किस गति से काम किया जाए।

यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की वॉशिंगटन यात्रा के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक होगी। जी-7 सम्मेलन में विश्व अर्थव्यवस्था, भू-राजनीतिक चुनौतियों, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा होने वाली है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय वार्ता पर भी अंतरराष्ट्रीय नजर रहेगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की अपनी यात्रा पर रवाना हो गए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर वह 13 से 14 जून तक नीस और 16 से 19 जून तक एवियन तथा पेरिस में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस दौरान वह जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ राष्ट्रपति मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। इसके बाद वह स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर जाएंगे, जो उसकी स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा होगी।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की बात करें तो फरवरी 2026 में राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए कुछ शुल्क दरों में कमी का उल्लेख किया था। साथ ही उन्होंने कहा था कि भारत अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि और कोयला क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर खरीद बढ़ाने पर सहमत हुआ है। ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि भारत रूसी तेल की खरीद कम कर अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से अधिक ऊर्जा आयात करेगा।


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वॉशिंगटन/नई दिल्लीः फ्रांस में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक होगी। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मुलाकात की पुष्टि की है। माना जा रहा है कि बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी विस्तार से चर्चा होगी। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जी-7 सम्मेलन के दौरान किसी अंतिम समझौते की संभावना कम है, लेकिन दोनों नेता बातचीत की दिशा और प्रगति की समीक्षा जरूर करेंगे।

ट्रेड डील पर जारी है गहन बातचीत

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, भारत और अमेरिका पिछले एक वर्ष से व्यापार समझौते को लेकर लगातार बातचीत कर रहे हैं। इसी वर्ष दोनों देशों ने एक संयुक्त ढांचा समझौते (जॉइंट फ्रेमवर्क एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद वार्ताओं में तेजी आई है। कुछ सप्ताह पहले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आया था और विभिन्न आर्थिक तथा व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा की थी।

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत और अमेरिका की आर्थिक संरचनाएं और कारोबारी प्रणालियां एक-दूसरे से काफी अलग हैं। यही वजह है कि कई विषयों पर अभी तकनीकी स्तर पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता बनी हुई है। अधिकारी ने यह भी बताया कि वह अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगे, ताकि लंबित मुद्दों पर आगे प्रगति सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में तय हो सकती है आगे की रणनीति

अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि जी-7 सम्मेलन में व्यापार समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा, लेकिन मोदी और ट्रंप की मुलाकात दोनों देशों को आगे की रणनीति तय करने का अवसर देगी। बैठक में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और यह भी देखा जाएगा कि आने वाले हफ्तों में समझौते को किस तरह आगे बढ़ाया जाए।

यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की वॉशिंगटन यात्रा के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक होगी। जी-7 सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, भू-राजनीतिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे विषयों पर चर्चा होनी है। ऐसे में भारत-अमेरिका वार्ता को भी विशेष महत्व मिल रहा है।

फ्रांस और स्लोवाकिया दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा पर रवाना हो गए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर वह 13 से 14 जून तक नीस तथा 16 से 19 जून तक एवियन और पेरिस में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस दौरान वह जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ राष्ट्रपति मैक्रों के साथ भी द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

फ्रांस यात्रा के बाद प्रधानमंत्री स्लोवाकिया जाएंगे। स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली राजकीय यात्रा होगी, जिसे दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के संदर्भ में फरवरी 2026 का घटनाक्रम भी अहम माना जा रहा है। उस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए कुछ शुल्क दरों में कमी का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि भारत अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि और कोयला क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर खरीद बढ़ाने पर सहमत हुआ है। ट्रंप ने यह दावा भी किया था कि भारत रूसी तेल की खरीद कम कर अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से अधिक ऊर्जा आयात करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रांस में होने वाली मोदी-ट्रंप मुलाकात व्यापार समझौते के अलावा ऊर्जा, निवेश, रक्षा सहयोग और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर भी दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दे सकती है।

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